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सुप्रीम कोर्ट ने मजिस्ट्रेट की फटकार लगाई, पूछा – हिम्मत कैसे हुई?

9/9/2026, 6:44:24 am
सुप्रीम कोर्ट ने मजिस्ट्रेट की फटकार लगाई, पूछा – हिम्मत कैसे हुई?
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ग्रेटर नोएडा के एक मजिस्ट्रेट की फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि छात्र को कारण बताओ नोटिस देना गलत था। मामला एक कॉलेज छात्र के शांतिपूर्ण प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें वह फीस बढ़ोतरी का विरोध कर रहा था। प्रदर्शन के बाद स्थानीय प्रशासन ने धारा 144 लगा दी और मजिस्ट्रेट ने छात्र को नोटिस थमा दिया। छात्र ने पहले हाईकोर्ट में याचिका लगाई, लेकिन राहत नहीं मिली। फिर वह सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच ने मजिस्ट्रेट से पूछा कि उसने छात्र के मौलिक अधिकारों का ध्यान रखा या नहीं। बेंच ने स्पष्ट कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है, और कोई भी अधिकारी बिना ठोस आधार के नोटिस नहीं जारी कर सकता। अदालत ने मजिस्ट्रेट के आदेश को अवैध करार देते हुए उसे वापस लेने और छात्र से माफी मांगने का निर्देश दिया। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए जो कानून का दुरुपयोग करते हैं। फैसले के बाद कई छात्र संगठनों और नागरिक समूहों ने इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को मजबूत करता है। कानून विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस तरह की टिप्पणी भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने में मददगार होगी। अदालत ने आगे कहा कि अगर किसी अधिकारी को लगता है कि उसने गलत किया है तो वह स्वयं सुधारात्मक कदम उठा सकता है, लेकिन अदालत को ऐसा नहीं छोड़ना चाहिए कि वह अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल करे। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून का पालन करना हर अधिकारी का दायित्व है और किसी भी स्थिति में इसका उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विशेष रूप से, इस मामले में छात्र का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन उसके साथियों ने कहा कि वह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहा था। कई शिक्षाविदों ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से शैक्षणिक संस्थानों में असहिष्णुता बढ़ती है। सरकार को अब स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने की जरूरत है ताकि ऐसे विवादों का समाधान बातचीत से हो। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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