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सुप्रीम कोर्ट: आर्थिक तंगी में बच्चा गोद देना बेचना नहीं

18/9/2026, 11:31:31 pm
सुप्रीम कोर्ट: आर्थिक तंगी में बच्चा गोद देना बेचना नहीं
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सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना के एक मामले में साफ कहा है कि आर्थिक तंगी की वजह से कोई माता‑पिता अपने बच्चे को गोद दे दें तो उसे बेचना नहीं माना जा सकता। मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने फैसले में कहा कि गोद देने का निर्णय केवल पैसों की कमी से नहीं, बल्कि बच्चे के भविष्य, सुरक्षा और सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए। मामला तेलंगाना के एक गरीब परिवार का था जिसने अपनी बेटी को एक संपन्न दंपति को गोद दे दिया था। बाद में परिवार ने आरोप लगाया कि बच्ची को बेचा गया है। निचली अदालत ने इसे बिक्री माना, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस निष्कर्ष को पलट दिया। बेंच ने स्पष्ट किया कि गोद लेने की प्रक्रिया कानूनी रूप से तय है। इसमें माता‑पिता की सहमति, बाल कल्याण समिति की रिपोर्ट और अदालत की मंजूरी शामिल होती है। केवल आर्थिक मजबूरी को आधार बनाकर इसे अवैध बिक्री कहना गलत होगा। अदालत ने यह भी कहा कि अगर गोद लेने की प्रक्रिया में धोखाधड़ी या दबाव साबित हो तो कार्रवाई हो सकती है, लेकिन केवल गरीबी को वजह मानकर माता‑पिता को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इस फैसले से उन हजारों परिवारों को राहत मिलेगी जो आर्थिक संकट में बच्चे को गोद देते हैं। साथ ही बाल संरक्षण एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे मामलों में संवेदनशीलता से काम करें और बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दें। कानून के जानकारों के अनुसार यह फैसला जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और केंद्रीय दत्तक ग्रहण नियमों के अनुरूप है, जो गरीबी को अपराध नहीं मानते। बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे गरीब परिवारों पर अनावश्यक कानूनी दबाव कम होगा। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि गोद लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहनी चाहिए ताकि किसी भी तरह की तस्करी न हो। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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