लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
विश्व

जब स्वामीनारायण संप्रदाय ने अदालत से कहा — 'हम हिंदू नहीं हैं'

14/9/2026, 1:27:18 pm
जब स्वामीनारायण संप्रदाय ने अदालत से कहा — 'हम हिंदू नहीं हैं'
Original publisher image
साल 1950 के दशक में बॉम्बे हाई कोर्ट के सामने एक अनोखा मामला आया। बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) ने याचिका दायर कर कहा कि उनका संप्रदाय हिंदू धर्म का हिस्सा नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र पंथ है। वजह थी बॉम्बे पब्लिक ट्रस्ट एक्ट, 1950। इसके तहत 'हिंदू धर्मार्थ ट्रस्ट' की परिभाषा तय की गई थी। बीएपीएस की दलील थी कि उनके मंदिर और संपत्तियां इस कानून के दायरे में नहीं आनी चाहिए क्योंकि वे हिंदू नहीं हैं। संस्था के वकीलों ने तर्क दिया कि स्वामीनारायण संप्रदाय के अपने अलग गुरु, ग्रंथ, मंदिर परंपरा और उपासना पद्धति हैं। वेदों की प्रामाणिकता नहीं मानते, जाति व्यवस्था नहीं मानते, और मूर्ति पूजा का अपना अलग स्वरूप रखते हैं। अदालत ने दोनों पक्ष सुने। फैसले में कहा गया कि भले ही संप्रदाय की अपनी विशिष्टताएं हों, लेकिन उसकी जड़ें हिंदू परंपरा में ही हैं। संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत 'हिंदू' शब्द की व्याख्या व्यापक है — इसमें सिख, जैन, बौद्ध और स्वामीनारायण जैसे पंथ भी शामिल माने गए। इस फैसले का असर दूरगामी रहा। बीएपीएस की संपत्तियां बॉम्बे पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के तहत रहीं। मगर संप्रदाय ने अपनी अलग पहचान बनाए रखी। आज बीएपीएस विश्वभर में फैला है — अक्षरधाम मंदिर, सामाजिक सेवा, शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है। कानूनी लड़ाई भले हार गए हों, पर स्वामीनारायण संप्रदाय ने अपनी विशिष्टता सिद्ध की। यह मामला भारतीय धर्मनिरपेक्षता की जटिलता दिखाता है — जहां आस्था, कानून और पहचान के सवाल आपस में गुंथे होते हैं।
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

संबंधित