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तालिबान के पांच साल: शरिया के साये में अफ़ग़ानिस्तान का हाल

16/8/2026, 1:11:43 pm
तालिबान के पांच साल: शरिया के साये में अफ़ग़ानिस्तान का हाल
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तालिबान ने अगस्त 2021 में काबुल पर कब्जा किया और इस्लामिक अमीरात की घोषणा की। पांच साल बाद देश का सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक ढांचा पूरी तरह बदल चुका है। शरिया कानून अब अदालतों, स्कूलों, बाजारों और मीडिया में लागू है। नए नियमों ने दैनिक जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया है। महिलाओं के सार्वजनिक जीवन पर कड़े प्रतिबंध लगे हैं। उन्हें बिना पुरुष अभिभावक के बाहर निकलने, काम करने या उच्च शिक्षा लेने की अनुमति नहीं है। लड़कियों की माध्यमिक शिक्षा बंद कर दी गई है। विश्वविद्यालयों में महिला छात्राओं का प्रवेश रोक दिया गया है और कई महिला शिक्षकों को बर्खास्त किया गया है। गैर‑सरकारी संगठनों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को काम करने की इजाजत नहीं मिली। बहुत से सहायता कार्यक्रम बंद हो गए हैं। अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही है। विदेशी सहायता लगभग ठप है, बेरोजगारी बढ़ी है और अफगानी मुद्रा का मूल्य तेजी से गिरा है। कृषि और छोटे कारोबार भी प्रतिबंधों की मार झेल रहे हैं। किसानों को बीज और खाद मिलने में दिक्कत हो रही है। पश्चिमी देशों ने तालिबान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन उनके पास दबाव बनाने के लिए सीमित साधन बचे हैं। कई दौर की बातचीत हुई, पर तालिबान ने मानवाधिकार शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। नतीजतन वार्ता आगे नहीं बढ़ी। संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठन लगातार उल्लंघनों की रिपोर्ट जारी कर रहे हैं। फिर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय एकजुट कार्रवाई नहीं कर पा रहा। पड़ोसी देशों पाकिस्तान, ईरान और चीन ने अपने हितों के हिसाब से तालिबान से संबंध बनाए रखे हैं। इससे दबाव और कम हुआ है। अगर मानवीय सहायता जल्द बहाल नहीं हुई तो लाखों अफ़ग़ान नागरिक भुखमरी, बीमारी और विस्थापन का सामना करेंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि दीर्घकालिक स्थिरता के लिए समावेशी शासन और महिला अधिकारों की बहाली जरूरी है। स्वास्थ्य सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। अस्पतालों में दवाओं और प्रशिक्षित कर्मियों की भारी कमी है। अफीम की खेती फिर से बढ़ी है, जिससे तालिबान को राजस्व मिल रहा है लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिबंध लगे हैं। शरणार्थी संकट भी गहराया है। लाखों अफ़ग़ान पड़ोसी देशों और यूरोप में शरण मांग रहे हैं। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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