विश्व
तमिलनाडु में फैक्ट्री मज़दूर और गृहणियां पहन रहे कैमरे, रोबोट सीख रहे इंसानों की तरह काम करना
18/9/2026, 4:20:04 pm

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तमिलनाडु के कोयम्बटूर और चेन्नई इलाक़ों में इन दिनों एक अनोखा नज़ारा दिख रहा है। फैक्ट्री में काम करने वाले मज़दूर और घर संभालने वाली महिलाएं अपने सिर पर छोटे-छोटे कैमरे बांधकर रोज़मर्रा के काम निपटा रहे हैं। कोई मशीन चला रहा है, कोई बर्तन धो रहा है, कोई कपड़े तह कर रहा है — और ये सब रिकॉर्ड हो रहा है।
ये कैमरे किसी टीवी शो के लिए नहीं लगे। ये डेटा जुटा रहे हैं उन कंपनियों के लिए जो एआई से चलने वाले रोबोट बना रही हैं। मक़सद साफ़ है: रोबोट्स को सिखाना कि इंसान असल ज़िंदगी में चीज़ें कैसे उठाते, रखते, मोड़ते और जोड़ते हैं।
"पहले हम लैब में रोबोट को सिखाते थे," एक स्टार्टअप के फाउंडर बताते हैं। "लेकिन असली दुनिया लैब जैसी नहीं होती। यहां रोशनी बदलती है, चीज़ें इधर-उधर होती हैं, लोग जल्दी-जल्दी हाथ चलाते हैं। वही असली डेटा चाहिए हमें।"
तमिलनाडु इसके लिए मुफ़ीद साबित हो रहा है। यहां टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स की सैकड़ों छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां हैं। साथ ही संयुक्त परिवारों का चलन अब भी आम है, जहां गृहणियां दिन भर तरह-तरह के घरेलू काम करती हैं। एक ही इलाक़े में इंडस्ट्रियल और घरेलू — दोनों तरह के टास्क मिल जाते हैं।
काम करने वालों को इसके बदले पैसा मिलता है। फैक्ट्री वर्कर को रोज़ाना 500-700 रुपये अतिरिक्त, गृहणियों को प्रति सत्र 300-400 रुपये। कई परिवारों के लिए ये अच्छी-ख़ासी आमदनी बन गई है। "पहले सिर्फ़ पति कमाते थे," एक महिला बताती हैं। "अब मेरे कैमरा पहनने से घर का खर्च आसान हो गया।"
डेटा जुटाने वाली कंपनियां इस बात का ख़याल रखती हैं कि निजी जानकारी — चेहरे, घर के अंदरूनी हिस्से, आईडी कार्ड — धुंधले कर दिए जाएं। सिर्फ़ हाथों की हरकत, औज़ारों का इस्तेमाल और चीज़ों के साथ इंटरैक्शन रिकॉर्ड होता है।
भारत में एआई डेटा कलेक्शन का बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है। NITI आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2025 तक ये 1.5 अरब डॉलर पार कर सकता है। तमिलनाडु के अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में भी ऐसे पायलट प्रोजेक्ट चल रहे हैं।
जानकार मानते हैं कि इससे भारत "दुनिया का डेटा फैक्ट्री" बनने की राह पर है। लेकिन साथ ही सवाल भी उठते हैं: क्या मज़दूरों को पता है उनके डेटा की क़ीमत क्या है? क्या लंबे समय में ये ऑटोमेशन उनकी नौकरियां ही न खा जाए?
फिलहाल तो कोयम्बटूर की उस छोटी सी फैक्ट्री में मशीन की आवाज़ के बीच कैमरा पहने एक मज़दूर मुस्कुराते हुए कहता है: "रोबोट सीख रहा है, हम कमा रहे हैं। दोनों का फ़ायदा है।"
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
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