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नींद में दांत पीसना: कारण, असर और आसान उपाय

14/9/2026, 3:11:10 pm
नींद में दांत पीसना: कारण, असर और आसान उपाय
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नींद में दांत पीसना एक आम समस्या है जिसे ब्रुक्सिज्म कहते हैं। लाखों लोग रात को अपने दांतों को कसकर या रगड़कर सोते हैं, पर ज्यादातर को इसका पता नहीं चलता। सुबह उठने पर जब जबड़े में दर्द, सिरदर्द या दांतों की सतह घिसी हुई मिले, तब अंदाजा लगता है कि रात को क्या हुआ। इसकी मुख्य वजह तनाव और चिंता होती है। काम का दबाव, पारिवारिक परेशानी या आर्थिक चिंता दिमाग को रात में भी सक्रिय रखती है, जिससे जबड़े की मांसपेशियाँ अनजाने में सिकुड़ जाती हैं। नींद की बीमारियाँ जैसे स्लीप एपनिया भी इसका कारण बनती हैं। कैफीन, शराब और कुछ दवाइयाँ (जैसे एंटीडिप्रेसेंट) दांत पीसने को बढ़ा सकती हैं। दांतों की बनावट में गड़बड़ी या जबड़े की हड्डी का असंतुलन भी ब्रुक्सिज्म को उकसाता है। लंबे समय तक दांत पीसने से दांतों की परत घिस जाती है, जिससे संवेदनशीलता और कैविटी का खतरा बढ़ता है। जबड़े के जोड़ (TMJ) में सूजन, कान के पास दर्द और बार‑बार सिरदर्द भी आम लक्षण हैं। इलाज की शुरुआत डेंटिस्ट से जांच करवाकर होती है। डेंटिस्ट अक्सर एक कस्टम नाइट गार्ड (माउथगार्ड) देते हैं जो दांतों को बचाता है। तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान या काउंसलिंग मददगार साबित होते हैं। रात को सोने से पहले कैफीन और शराब छोड़ना, नियमित नींद का समय तय करना और गहरी साँस लेने की तकनीक अपनाना भी फर्क लाता है। अगर स्लीप एपनिया है तो CPAP मशीन या अन्य उपचार से नींद सुधरती है और दांत पीसना कम होता है। समस्या को नज़रअंदाज़ न करें। समय पर डेंटिस्ट और नींद विशेषज्ञ से सलाह लेने पर दांत, जबड़ा और समग्र सेहत सुरक्षित रहती है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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