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ठाणे कोर्ट ने नाबालिग से बार‑बार दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा सुनाई

29/8/2026, 5:31:24 am
ठाणे कोर्ट ने नाबालिग से बार‑बार दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा सुनाई
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महाराष्ट्र के ठाणे जिले की जिला एवं सत्र अदालत ने एक 28 वर्षीय व्यक्ति को 13 साल की लड़की के साथ कई महीनों तक बार‑बार दुष्कर्म करने के अपराध में 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी कहा कि नाबालिग की सहमति कानून में कोई मान्यता नहीं रखती और पॉक्सो अधिनियम के तहत ऐसी सहमति पूरी तरह अमान्य है। पीड़िता ने 2018 में अपने पड़ोसी के घर में बुलाए जाने पर पहली बार शारीरिक शोषण की शिकायत की थी, लेकिन परिवार ने डर और सामाजिक दबाव के कारण पुलिस को सूचना नहीं दी। कुछ महीने बाद लड़की ने स्कूल की शिक्षिका को घटना बताई, जिसके बाद मामला दर्ज हुआ और पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 4, 6 और भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे के दौरान अभियोजन ने चिकित्सकीय रिपोर्ट, पीड़िता के बयान और दो गवाहों के बयान को आधार बनाया, जबकि बचाव पक्ष ने यह दलील दी कि लड़की की सहमति थी। न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि अवयस्क की सहमति किसी भी स्थिति में कानूनी रक्षा नहीं बन सकती, क्योंकि पॉक्सो कानून नाबालिग की सहमति को अमान्य मानता है। अदालत ने दोषी को 20 साल का कठोर कारावास और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया, साथ ही कहा कि ऐसा निर्णय समाज में स्पष्ट संदेश देता है कि बच्चों के प्रति किसी भी तरह का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं ने फैसले का स्वागत किया और कहा कि देरी के बावजूद न्याय मिलना महत्वपूर्ण है। इस मामले से यह भी सामने आया कि सबूत जुटाने में देरी और पीड़िता के बयान को दोहराने की प्रक्रिया से मुकदमा लंबा खिंच गया। सरकार ने अब पॉक्सो के तहत त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतें बढ़ाने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद राज्य सरकार ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और मनोवैज्ञानिक परामर्श देने की योजना भी शुरू की है। स्थानीय मीडिया ने इस निर्णय को बाल सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम बताया है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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