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थर्मल रसीदों के रसायन प्रजनन क्षमता पर डाल सकते हैं असर

18/9/2026, 4:01:16 pm
थर्मल रसीदों के रसायन प्रजनन क्षमता पर डाल सकते हैं असर
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ऑनलाइन खरीदारी के बाद मिलने वाली थर्मल पेपर की रसीदें अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नज़र में हैं। कई फिटनेस इन्फ्लुएंसर और स्वास्थ्य ब्लॉगर दावा कर रहे हैं कि इन रसीदों में मौजूद रसायन हार्मोन को बिगाड़ सकते हैं और प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकते हैं। थर्मल पेपर में बिस्फेनॉल ए (BPA) और बिस्फेनॉल एस (BPS) जैसे केमिकल होते हैं। ये केमिकल त्वचा के संपर्क में आकर शरीर में घुल सकते हैं। शोध बताते हैं कि लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से एंडोक्राइन सिस्टम प्रभावित होता है, जिससे शुक्राणु गुणवत्ता और अंडाशय कार्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। ब्रिटेन की एक प्रमुख यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 250 से अधिक वयस्कों पर अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि जिन लोगों ने रोज़ाना चार से अधिक रसीदें छुईं, उनके रक्त में BPA का स्तर उन लोगों से दोगुना था जो रसीदों से दूर रहते थे। यही उच्च स्तर हार्मोन संतुलन को बिगाड़ता है। भारत में भी कुछ लैब टेस्ट ने थर्मल रसीदों में BPA की मात्रा 10 से 30 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम पेपर तक पाई। हालांकि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अभी तक कोई सीमा तय नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि सावधानी बरतना ज़रूरी है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि रसीद को छूने के बाद तुरंत साबुन से हाथ धो लें। संभव हो तो डिजिटल रसीद या ईमेल रसीद का विकल्प चुनें। गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और गर्भधारण की योजना बना रहे जोड़ों को खास ध्यान रखना चाहिए। कुछ खुदरा श्रृंखलाएं अब BPA-मुक्त थर्मल पेपर का उपयोग शुरू कर रही हैं। ग्राहक दुकानदार से पूछ सकते हैं कि उनकी रसीद किस पेपर पर छपी है। जागरूकता बढ़ने से बाज़ार में सुरक्षित विकल्पों की मांग बढ़ रही है। सरकारी एजेंसियों ने अभी तक कोई आधिकारिक चेतावनी जारी नहीं की है, लेकिन वैज्ञानिक समुदाय लगातार नए आंकड़े जुटा रहा है। तब तक सावधानी बरतना ही समझदारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि रसीदों को जेब में रखने से बचें और उन्हें सीधे कचरे में डाल दें। बच्चों को भी रसीदों से दूर रखना चाहिए क्योंकि उनकी त्वचा अधिक संवेदनशील होती है। अगले कुछ वर्षों में भारत सरकार नई गाइडलाइन जारी कर सकती है जिसमें थर्मल पेपर में BPA की अधिकतम सीमा तय की जाएगी। तब तक उपभोक्ता खुद जागरूक रहकर जोखिम कम कर सकते हैं। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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