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टीएमसी सिंबल विवाद: ममता और ऋतब्रत गुट की आज EC में सुनवाई, बंगाल उपचुनाव से पहले क्यों अहम?
17/9/2026, 12:38:04 am

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चुनाव आयोग ने आज टीएमसी के दो गुटों – ममता बनर्जी के समर्थकों और ऋतब्रत सरकार के समर्थकों – को चुनाव चिह्न के मुद्दे पर सुनवाई के लिए बुलाया है। यह सुनवाई बंगाल के नंदीग्राम‑रेजीनगर उपचुनाव से कुछ दिन पहले हो रही है, इसलिए इसका परिणाम सीधे चुनावी मैदान पर असर डाल सकता है।
विवाद की जड़ पिछले साल के विधानसभा चुनाव में है जब दोनों side ने दावा किया कि वे असली तृणमूल कांग्रेस हैं और पार्टी का आधिकारिक चुनाव चिह्न उनका होना चाहिए। ममता बनर्जी गुट का कहना है कि पार्टी के संविधान और पुराने दस्तावेज़ स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि चिह्न उनके नियंत्रण में है, जबकि ऋतब्रत गुट का दावा है कि उन्होंने आंतरिक चुनाव जीता है और नए संशोधन के बाद चिह्न पर उनका अधिकार स्थापित हो गया है।
ममता बनर्जी की ओर से पेश किए गए सबूत में पार्टी की संस्थापक घोषणा, पुराने चुनावी affidavit और चुनाव आयोग को जमा किए गए वार्षिक रिपोर्ट शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऋतब्रत गुट ने बिना उचित प्रक्रिया के पार्टी के नाम और चिह्न का इस्तेमाल किया है, जिससे मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
इसके विपरीत, ऋतब्रत सरकार गुट ने प्रस्तुत किया कि उन्होंने पार्टी की आंतरिक चुनाव में बहुमत हासिल किया है और नए संविधान संशोधन के माध्यम से चुनाव चिह्न पर अपने दावे को वैध ठहराया है। उनका तर्क है कि ममता बनर्जी ने एकतरफा फैसले लेकर पार्टी की लोकतांत्रिक भावना को कमजोर किया है।
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि आज की सुनवाई में दोनों पक्षों को समान समय दिया जाएगा और कोई भी नया दस्तावेज़ पेश करने की अनुमति होगी। आयोग ने स्पष्ट किया कि वह पार्टी के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा, लेकिन चुनाव चिह्न का स्पष्ट आवंटन करना आवश्यक है ताकि मतदाताओं को कोई गलतफहमी न हो।
यदि आयोग ममता बनर्जी गुट को चिह्न देता है, तो ऋतब्रत गुट को नया चुनाव चिह्न चुनना होगा, जिससे उनके उम्मीदवारों की पहचान पर असर पड़ सकता है। उल्टा स्थिति में, यदि ऋतब्रत गुट को चिह्न मिलता है, तो ममता बनर्जी को अपने उम्मीदवारों को अलग चिह्न पर उतारना पड़ेगा, जिससे उनकी चुनावी रणनीति में बदलाव आएगा।
इस प्रकार आज की सुनवाई न केवल तृणमूल कांग्रेस के भविष्य को तय करेगी बल्कि impending बंगाल उपचुनाव की गतिशीलता को भी प्रभावित कर सकती है। सभी पक्ष अब आयोग के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
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