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त्रिपुरा विधानसभा में डीजीपी की मौत पर हंगामा, सुसाइड नोट को लेकर कांग्रेस का हमला
30/8/2026, 10:23:12 pm

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त्रिपुरा विधानसभा में सोमवार को डीजीपी की मौत के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने इस मामले को उठाया और सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। डीजीपी अनिल कुमार की मौत उनके सरकारी आवास पर हुई थी और प्रारंभिक रिपोर्ट में आत्महत्या की आशंका जताई गई थी।
कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने कहा कि डीजीपी की पत्नी के पास सुसाइड नोट की तस्वीर मौजूद है, लेकिन मूल प्रति अब तक सामने नहीं आई है। उन्होंने पूछा कि नोट की असली कॉपी कहां रखी गई है। नोट में कथित तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों के दबाव और भ्रष्टाचार के आरोप लिखे होने की बात कही जा रही है।
बर्मन ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस महकमा और राज्य सरकार मिलकर इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने जांच में हो रही देरी पर सवाल उठाए और त्वरित कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि नोट की फोटो सार्वजनिक करने से पहले इसकी प्रामाणिकता की जांच जरूरी है।
सत्ता पक्ष के मंत्री ने जवाब में बताया कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सीबीआई की टीम पहले ही मौके पर पहुंच चुकी है।
दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित कर दी। विपक्ष ने सदन के बाहर भी प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। विपक्षी सदस्यों ने सदन के बाहर धरना दिया और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की।
इस घटना ने त्रिपुरा की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। आम जनता भी सुसाइड नोट की सच्चाई जानने के लिए उत्सुक है और सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा चल रही है। स्थानीय मीडिया ने भी इस मामले को प्रमुखता से कवर किया है।
पुलिस विभाग ने अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, जबकि डीजीपी के परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि उन्हें नोट की मूल प्रति देखने का अधिकार है। परिवार ने अदालत में याचिका दायर करने का भी संकेत दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आगामी चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्ष इसे सरकार की विफलता के रूप में पेश कर रहा है, जबकि सत्ता पक्ष जांच की पारदर्शिता पर जोर दे रहा है। चुनावी साल में इस मुद्दे का असर मतदाताओं पर पड़ना तय माना जा रहा है।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
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