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ट्रम्प की एच-1बी फीस बढ़ोतरी: 92% आवेदन घटे, भारतीय डायस्पोरा नाराज

19/9/2026, 8:16:14 pm
ट्रम्प की एच-1बी फीस बढ़ोतरी: 92% आवेदन घटे, भारतीय डायस्पोरा नाराज
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ट्रम्प प्रशासन ने एच-1बी वीजा के नए नियम लागू किए हैं। नए नियम में आवेदन शुल्क को 95 लाख रुपये तक बढ़ा दिया गया है। पहले यह शुल्क केवल कुछ हज़ार रुपये था, लेकिन अब कंपनियों को हर याचिका के लिए लगभग एक करोड़ रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। इस बढ़ोतरी के बाद वीजा आवेदनों में 92 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय आईटी पेशेवर और उनके परिवार इस फैसले से बेहद नाराज़ हैं। कई बड़ी टेक कंपनियों ने भर्ती योजनाएं टाल दी हैं और कुछ ने तो अमेरिका में नए प्रोजेक्ट शुरू करने से इनकार कर दिया है। अमेरिकी श्रम विभाग का कहना है कि शुल्क बढ़ाने का मकसद घरेलू नौकरियों को बचाना और विदेशी श्रमिकों पर निर्भरता कम करना है। लेकिन अर्थशास्त्रियों और उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक नुकसान होगा क्योंकि कुशल प्रतिभा देश छोड़कर चली जाएगी। भारतीय डायस्पोरा ने संसद, मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर विरोध दर्ज कराया है। नैसकॉम और यूएसआईएसपीएफ जैसे उद्योग संगठनों ने बयान जारी कर इस कदम को “प्रतिभा पलायन” बताया है। कई सांसदों ने इस मुद्दे पर विधेयक लाने की मांग की है और विदेश मंत्री से बातचीत की अपील की है। फिलहाल सरकार की ओर से कोई स्पष्ट नीति घोषित नहीं की गई है, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बाइडन प्रशासन इस नीति की समीक्षा करता है तो आवेदनों की संख्या फिर से बढ़ सकती है। पिछले वर्ष भारतीय नागरिकों ने एच-1बी के तहत लगभग 1.2 लाख याचिकाएं दाखिल की थीं, लेकिन नई फीस के बाद यह संख्या 10 हज़ार से नीचे चली गई है। अमेरिकी विश्वविद्यालयों ने भी चिंता जताई है क्योंकि विदेशी छात्रों को वीजा मिलने में देरी हो रही है। कई भारतीय स्टार्टअप ने अमेरिकी बाजार में विस्तार की योजना स्थगित कर दी है, जिससे निवेशकों की रुचि घटी है। कानूनी जानकारों का कहना है कि नई फीस संविधान के समान सुरक्षा प्रावधानों का उल्लंघन कर सकती है, इसलिए कई अदालतों में याचिकाएं दायर की गई हैं। भारत सरकार ने अमेरिकी अधिकारियों के सामने इस मुद्दे को उठाया है और द्विपक्षीय वार्ता में इसे प्राथमिकता देने का अनुरोध किया है। आने वाले महीनों में कांग्रेस में एक संशोधन विधेयक पेश किए जाने की संभावना है, जिससे शुल्क को फिर से तर्कसंगत बनाया जा सके। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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