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सोने का खजाना: 3,000 साल बाद खुली राजा टूटनखामुन की कब्र और श्राप की कहानी

3/9/2026, 1:57:18 am
सोने का खजाना: 3,000 साल बाद खुली राजा टूटनखामुन की कब्र और श्राप की कहानी
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मिस्र की रेत में हजारों साल तक दबी राजाओं की कब्रें 1920 के दशक में अचानक चर्चा में आईं। ब्रिटिश पुरातत्वविद हावर्ड कार्टर और उनके धनवान साथी लॉर्ड कार्नार्वन ने नील घाटी की राजा‑घाटी में एक मुहरबंद कक्ष का पता लगाया। जब उन्होंने चूना पत्थर का दरवाज़ा तोड़ा, तो अंदर एक शानदार ताबूत निकला जिसे बाद में टूटनखामुन के नाम से जाना गया। उस ताबूत के भीतर सोने के गहने, अमूल्य मूर्तियाँ, रत्नजड़ित हथियार और दैनिक उपयोग की वस्तुएँ भरी पड़ी थीं। विशेष रूप से टूटनखामुन का सोने का मास्क, जो अब तक की सबसे प्रसिद्ध प्राचीन कृतियों में से एक है, ने सबको चौंका दिया। इस खबर ने यूरोप और अमेरिका में “मिस्र बुखार” फैला दिया, संग्रहालयों में भीड़ जुटी और फैशन, साहित्य तथा संगीत में मिस्रीयन रूपांकनों का बोलबाला हो गया। अविश्वसनीय धन के साथ एक किंवदंती भी जन्मी — “राजा का श्राप”। कहा गया कि जो भी इस कब्र को छुएगा, उसकी अकाल मृत्यु होगी। कार्टर की टीम के कुछ सदस्यों की असामान्य मौतों ने इस बात को हवा दी, हालांकि बाद के वैज्ञानिक अध्ययनों ने किसी भी अलौकिक कारण को खारिज कर दिया। हाल के वर्षों में आधुनिक तकनीक — जैसे CT स्कैन और DNA विश्लेषण — ने टूटनखामुन की शारीरिक स्थिति और पारिवारिक संबंधों पर नई रोशनी डाली है। कुछ शोधकर्ता मानते हैं कि कब्र के एक बंद कमरे में अभी भी छिपे हुए कलाकृतियाँ हो सकती हैं, जिससे भविष्य की खुदाई की संभावना बनी हुई है। भारत में भी इस खोज ने इतिहासकारों और यात्रियों दोनों की रुचि बढ़ाई। कई भारतीय संग्रहालयों ने मिस्र की प्रतिकृतियों की प्रदर्शनी लगाई, जबकि ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर मिस्र के इतिहास के वीडियो लाखों बार देखे गए। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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