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यूपी‑बिहार के स्टेशनों पर अब टिकट के लिए लाइन नहीं, घूम‑घूमकर बेचेंगे सहायक

2/9/2026, 8:09:30 am
यूपी‑बिहार के स्टेशनों पर अब टिकट के लिए लाइन नहीं, घूम‑घूमकर बेचेंगे सहायक
भारतीय रेलवे ने उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख स्टेशनों पर टिकट खरीदने का नया तरीका शुरू किया है। अब यात्रियों को कतार में खड़े होने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि मोबाइल पीओएस सहायक प्लेटफॉर्म पर घूम‑घूमकर टिकट बेचेंगे। ये सहायक हाथ में एक छोटी मशीन रखते हैं जो तुरंत टिकट प्रिंट करती है और डिजिटल भुगतान भी स्वीकार करती है। पहले चरण में गोरखपुर, वाराणसी, पटना, मुजफ्फरपुर और दरभंगा स्टेशनों पर सेवा चालू की गई है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इससे भीड़ कम होगी और यात्रियों का समय बचेगा। सहायकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे सही किराया बता सकें और यूपीआई, कार्ड या नकद से भुगतान ले सकें। स्टेशन प्रबंधकों को निर्देश दिया गया है कि मांग के अनुसार सहायकों की संख्या बढ़ाई जाए। स्थानीय यात्रियों ने इस पहल का स्वागत किया है और कहा कि बुजुर्ग तथा दिव्यांग यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। रेलवे ने भविष्य में इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी लागू करने की योजना बनाई है। प्रत्येक स्टेशन पर कम से कम पांच सहायक तैनात किए गए हैं और पीक आवर्स में इनकी संख्या दोगुनी की जा सकती है। सहायकों के पास हैंडहेल्ड डिवाइस होता है जो रियल‑टाइम सीट उपलब्धता दिखाता है और यात्री क्यूआर कोड स्कैन करके भी टिकट ले सकते हैं। प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक काउंटर पर भीड़ करीब 40 प्रतिशत घटी है। रेलवे बोर्ड ने इस पायलट प्रोजेक्ट की समीक्षा के लिए एक महीने की अवधि तय की है। समीक्षा के बाद इसे देश के अन्य हिस्सों में विस्तारित किया जाएगा। यह पहल डिजिटल इंडिया अभियान के तहत लाई गई है जिससे पेपरलेस टिकटिंग को बढ़ावा मिलेगा। यात्री अब अपने मोबाइल पर ही टिकट की पुष्टि देख सकते हैं और प्रिंटआउट की जरूरत नहीं होगी। रेलवे ने सहायकों की पहचान के लिए विशेष जैकेट और बैज दिए हैं ताकि यात्री उन्हें आसानी से पहचान सकें। स्टेशन पर सूचना बोर्ड भी अपडेट किए गए हैं जिनमें मोबाइल पीओएस सहायकों की तैनाती का समय दिखाया जाता है। आने वाले महीनों में इस सेवा को लखनऊ, कानपुर, गया और भागलपुर जैसे स्टेशनों तक बढ़ाया जाएगा। समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)

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