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यूपीआई एमडीआर नियमों पर सियासी तकरार, जयराम रमेश बोले- सरकार ने भरोसा तोड़ा
15/9/2026, 5:18:29 am

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यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) से जुड़े नए नियमों पर सियासी घमासान छिड़ गया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि नए ढांचे से डिजिटल भुगतान की बुनियाद कमजोर होगी।
रमेश ने एक बयान में कहा, "यूपीआई देश की सार्वजनिक डिजिटल संपत्ति है। इसे चंद कॉरपोरेट घरानों के फायदे के लिए नहीं चलाया जा सकता। सरकार ने बिना संसदीय चर्चा के जो नया एमडीआर ढांचा थोपा है, वह भरोसे और पारदर्शिता — दोनों को तोड़ता है।"
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने इसी हफ्ते संशोधित एमडीआर नियम जारी किए।
इसके तहत 2,000 रुपये से ऊपर के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट को 0.3% से 0.5% तक शुल्क देना पड़ सकता है।
छोटे दुकानदारों और कम मार्जिन वाले कारोबारियों को इससे सीधी चोट पहुंचने की आशंका है।
कांग्रेस नेता ने पूछा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बार‑बार 'डिजिटल इंडिया' और 'कैशलेस अर्थव्यवस्था' का नारा देते हैं, तो फिर आम व्यापारी पर बोझ क्यों डाला जा रहा है?
रमेश ने मांग की कि सरकार तुरंत स्पष्ट करे कि एमडीआर की रकम किसके खाते में जाएगी और छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
उधर, भाजपा प्रवक्ताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि यूपीआई ढांचे को टिकाऊ बनाने के लिए मामूली शुल्क जरूरी है।
पार्टी के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि 95% से ज्यादा लेनदेन 2,000 रुपये से कम के होते हैं, इसलिए आम ग्राहक और छोटे दुकानदार पर असर न के बराबर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क की पारदर्शी व्यवस्था और छोटे व्यापारियों के लिए छूट का प्रावधान ही इस विवाद का हल निकाल सकता है।
फिनटेक कंपनियों ने भी चिंता जताई है कि नया शुल्क ढांचा नवाचार को धीमा कर सकता है और नए स्टार्टअप के लिए प्रवेश बाधा बनेगा।
उपभोक्ता संगठनों ने मांग की है कि सरकार एक स्वतंत्र समीक्षा समिति बनाए जो एमडीआर दरों की समीक्षा करे और जनहित में सुधार सुझाए।
आरबीआई ने कहा है कि वह बाजार की प्रतिक्रिया पर नजर रखेगा और जरूरत पड़ने पर दरों में बदलाव करेगा।
इस बीच, डिजिटल भुगतान के उपयोगकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है और सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
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