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दो हज़ार रुपये से ऊपर की यूपीआई पेमेंट पर 0.4% शुल्क, एनपीसीआई ने किया ऐलान

15/9/2026, 2:50:34 pm
दो हज़ार रुपये से ऊपर की यूपीआई पेमेंट पर 0.4% शुल्क, एनपीसीआई ने किया ऐलान
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एनपीसीआई ने ऐलान किया है कि अब दो हज़ार रुपये से ज्यादा की पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगेगा। यह शुल्क अधिकतम तीन सौ रुपये तक ही होगा। नई व्यवस्था 1 अक्टूबर से लागू होगी। बैंकों और पेमेंट गेटवे को इस शुल्क को ग्राहक या व्यापारी के खाते से काटना होगा। एनपीसीआई ने कहा कि यह कदम डिजिटल भुगतान की लागत को साझा करने के लिए उठाया गया है। छोटे दुकानदारों का कहना है कि इस शुल्क से उनका मुनाफा घट सकता है, खासकर जब ग्राहक छोटी रकम का भुगतान करते हैं। बड़े व्यापारी पहले से ही दूसरे भुगतान माध्यमों पर शुल्क चुकाते हैं, इसलिए उन्हें ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। आम उपभोक्ता के लिए सीधा असर यह है कि दो हज़ार रुपये से कम के लेनदेन पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। लेकिन अगर कोई बड़ी खरीद करता है तो व्यापारी शुल्क को ग्राहक पर डाल सकता है, जिससे अंतिम कीमत बढ़ सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम यूपीआई के विस्तार को धीमा कर सकता है, अगर व्यापारी शुल्क से बचने के लिए नकद या दूसरे माध्यम अपनाते हैं। हालांकि एनपीसीआई का दावा है कि शुल्क की ऊपरी सीमा तीन सौ रुपये रखने से बड़े लेनदेन पर असर सीमित रहेगा। सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। इस नए शुल्क के बाद भी यूपीआई की लोकप्रियता बनी रह सकती है, बशर्ते बैंक और फिनटेक कंपनियां ग्राहकों को जागरूक करें। रिजर्व बैंक ने पहले ही स्पष्ट किया था कि यूपीआई लेनदेन पर किसी भी तरह का शुल्क लगाने का अधिकार केवल एनपीसीआई के पास है। इस घोषणा के बाद बैंकों ने अपने ग्राहकों को सूचित करना शुरू कर दिया है कि बड़े भुगतान पर अतिरिक्त चार्ज दिखाई दे सकता है। उद्योग संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर शुल्क का बोझ पूरी तरह व्यापारी पर डाला गया तो छोटे कारोबार डिजिटल भुगतान से दूर हो सकते हैं। उन्होंने मांग की है कि एक निश्चित सीमा तक के लेनदेन पर शुल्क माफ रखा जाए, ताकि ग्रामीण इलाकों में यूपीआई की पहुंच बनी रहे। एनपीसीआई ने यह भी कहा है कि शुल्क की राशि को पारदर्शी तरीके से दिखाया जाएगा, ताकि ग्राहक और व्यापारी दोनों को पता चले कि कितना चार्ज काटा गया है। आने वाले महीनों में इस नीति की समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर दरों में बदलाव किया जा सकता है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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