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UPI भुगतान अब मुफ्त नहीं, कारोबारी ग्राहकों से वसूलेंगे शुल्क

16/9/2026, 1:00:03 am
UPI भुगतान अब मुफ्त नहीं, कारोबारी ग्राहकों से वसूलेंगे शुल्क
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यूपीआई भुगतान अब मुफ्त नहीं रहा। नए नियम के तहत कारोबारी ग्राहक से शुल्क वसूल सकेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक और एनपीसीआई ने हाल ही में एक सर्कुलर जारी किया जिसमें बताया गया है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को फिर से लागू किया जा रहा है। यह शुल्क पहले केवल कार्ड भुगतान पर लगता था, अब यूपीआई पर भी लगेगा। आम ग्राहक के लिए इसका मतलब है कि हर लेनदेन पर एक छोटी रकम कट सकती है। उदाहरण के लिए, 1000 रुपये के भुगतान पर 0.30 प्रतिशत यानी 3 रुपये तक का शुल्क लग सकता है। छोटे दुकानदार इसे ग्राहक से वसूलेंगे या खुद वहन करेंगे, यह उनकी नीति पर निर्भर करेगा। बैंकों और भुगतान गेटवे ने कहा है कि शुल्क की सीमा 0.30 प्रतिशत तक रहेगी और अधिकतम 150 रुपये प्रति लेनदेन होगी। बड़े व्यापारी अक्सर इस शुल्क को अपने मार्जिन में समायोजित कर लेते हैं, लेकिन छोटे कारोबारियों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन सकता है। ग्राहक चाहें तो अन्य भुगतान विकल्प जैसे नकद, कार्ड या वॉलेट का उपयोग कर सकते हैं। हालांकि यूपीआई की सुविधा और गति को देखते हुए अधिकांश लोग इसे ही पसंद करते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम डिजिटल भुगतान व्यवस्था को टिकाऊ बनाने के लिए उठाया गया है। एनपीसीआई के अनुसार शुल्क से प्राप्त राशि इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार और सुरक्षा मजबूती में लगेगी। उपभोक्ता संगठनों ने मांग की है कि शुल्क की पारदर्शिता बनी रहे और ग्राहकों को पहले से सूचित किया जाए। रिजर्व बैंक ने भी बैंकों को निर्देश दिया है कि वे शुल्क की जानकारी अपने ऐप और वेबसाइट पर प्रमुखता से दिखाएं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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