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यूरिन टेस्ट से 90% ब्लैडर कैंसर पकड़ में

5/9/2026, 3:17:55 am
यूरिन टेस्ट से 90% ब्लैडर कैंसर पकड़ में
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नए शोध में पता चला है कि एक साधारण यूरिन टेस्ट 10 में से 9 से ज्यादा ब्लैडर कैंसर के मामलों को पकड़ सकता है। यह अध्ययन ब्रिटेन के एक प्रमुख मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है और इसमें 1,200 से अधिक मरीजों के नमूने शामिल थे। शोधकर्ताओं ने यूरिन में मौजूद विशेष बायोमार्कर की जांच की और पाया कि टेस्ट की संवेदनशीलता 92 प्रतिशत से अधिक है। ब्लैडर कैंसर आमतौर पर 60 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में होता है और इसका पहला लक्षण यूरिन में खून आना होता है। अब तक डॉक्टर सिस्टोस्कोपी जैसी आक्रामक प्रक्रिया का सहारा लेते थे, जिसमें मरीज को असुविधा और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती थी। नया यूरिन टेस्ट बिना किसी चीर-फाड़ के किया जा सकता है और परिणाम कुछ घंटों में मिल जाते हैं, जिससे मरीज को तनाव कम होता है। अध्ययन के मुख्य लेखक ने कहा कि इस टेस्ट से शुरुआती चरण में कैंसर का पता लगाना आसान होगा और इलाज की सफलता दर बढ़ेगी। भारत में भी ब्लैडर कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, खासकर धूम्रपान करने वालों और रासायनिक उद्योग में काम करने वालों में। अगर यह टेस्ट बड़े पैमाने पर उपलब्ध होता है तो ग्रामीण इलाकों में भी जल्दी जांच संभव होगी और मरीज समय पर इलाज शुरू कर सकेंगे। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि टेस्ट को नियमित स्क्रीनिंग का हिस्सा बनाने से पहले बड़े पैमाने पर और परीक्षण जरूरी हैं। फिलहाल शोधकर्ता टेस्ट की लागत कम करने, इसकी सटीकता और बढ़ाने तथा विभिन्न आयु वर्गों में इसके प्रदर्शन को परखने पर काम कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस तरह के गैर-आक्रामक जांच विधियों को कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम में शामिल करने की सिफारिश की है। इससे स्वास्थ्य प्रणाली पर बोझ कम होगा और मरीजों की जीवन गुणवत्ता सुधरेगी। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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