लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
भारत

अमेरिकी फेड ने ब्याज दरें स्थिर रखीं, अब अक्टूबर में आरबीआई की परीक्षा

19/9/2026, 5:34:18 am
अमेरिकी फेड ने ब्याज दरें स्थिर रखीं, अब अक्टूबर में आरबीआई की परीक्षा
Original publisher image
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को अपनी बैठक में ब्याज दरें 5.25-5.50 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया। यह लगातार दूसरी बार है जब फेड ने दरें नहीं बढ़ाईं। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि महंगाई अभी भी लक्ष्य से ऊपर है, लेकिन अर्थव्यवस्था में मंदी के संकेत दिख रहे हैं। इस फैसले का सीधा असर भारत पर पड़ेगा। डॉलर के मुकाबले रुपया पिछले हफ्ते 83.20 के स्तर पर पहुंच गया था। फेड के रुख से डॉलर में थोड़ी नरमी आई है, जिससे रुपये को राहत मिल सकती है। विदेशी निवेशकों की आवक भी बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, चुनौतियां बरकरार हैं। कच्चे तेल की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब हैं। खाद्य महंगाई, खासकर सब्जियों और दालों के दाम, अभी भी चिंता का विषय हैं। अगस्त में खुदरा महंगाई 6.83 प्रतिशत रही, जो आरबीआई के 2-6 प्रतिशत के दायरे से बाहर है। अब सबकी नजर 4-6 अक्टूबर को होने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक पर है। गवर्नर शक्तिकांत दास के सामने दोहरी चुनौती है: महंगाई काबू में लानी है और वृद्धि की रफ्तार भी बनाए रखनी है। रेपो रेट अभी 6.50 प्रतिशत पर है। बाजार के ज्यादातर जानकार मानते हैं कि आरबीआई इस बार भी दरें यथावत रखेगा, लेकिन रुख 'सतर्क' बना रहेगा। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कच्चा तेल 100 डॉलर पार करता है तो आरबीआई को दिसंबर में दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। वहीं, फेड ने संकेत दिया है कि इस साल एक और बढ़ोतरी संभव है। ऐसे में पूंजी निकासी का जोखिम बना रहेगा। सरकार ने हाल में गेहूं और चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए हैं। प्याज के निर्यात पर 40 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है। इन कदमों से घरेलू आपूर्ति बढ़ेगी, लेकिन किसानों की नाराजगी का खतरा भी है। आम आदमी के लिए राहत की बात यह है कि ईएमआई अभी नहीं बढ़ेगी। होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें स्थिर रहेंगी। लेकिन अगर महंगाई नहीं घटी तो आगे चलकर कर्ज महंगा हो सकता है। अगले कुछ हफ्ते अहम होंगे। मानसून की विदाई, खरीफ फसल की आवक, वैश्विक तेल बाजार और फेड के अगले कदम — ये सब मिलकर तय करेंगे कि अक्टूबर में आरबीआई क्या फैसला लेता है।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

संबंधित