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अमेरिका ने ग्रीन कार्ड के ‘पब्लिक चार्ज’ नियम कड़े किए, भारतीय प्रवासियों पर असर

20/8/2026, 1:34:48 am
अमेरिका ने ग्रीन कार्ड के ‘पब्लिक चार्ज’ नियम कड़े किए, भारतीय प्रवासियों पर असर
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अमेरिका ने ग्रीन कार्ड के लिए ‘पब्लिक चार्ज’ नियम को फिर से सख्ती से लागू कर दिया है। अब यदि कोई आवेदक किसी भी सरकारी सहायता योजना का लाभ ले रहा है, तो उसका आवेदन खारिज किया जा सकता है। बाइडन प्रशासन ने यह कदम आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के नाम पर उठाया है। नए दायरे में मेडिकेड, फूड स्टैम्प (SNAP), हाउसिंग वाउचर और नकद सहायता जैसी योजनाएं शामिल हैं। अधिकारी आवेदक की आयु, स्वास्थ्य, शिक्षा, पारिवारिक स्थिति और वित्तीय इतिहास का विस्तृत आकलन करेंगे। अगर उन्हें लगता है कि भविष्य में आवेदक सरकारी मदद पर निर्भर रह सकता है, तो ग्रीन कार्ड नहीं मिलेगा। भारतीय प्रवासियों के लिए यह बड़ी चिंता का विषय है। अमेरिका में लगभग 48 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या H‑1B वीजा पर काम करने वाले पेशेवर और उनके परिवार हैं। नौकरी छूटने, चिकित्सा आपातकाल या पारिवारिक संकट में कई बार अस्थायी सरकारी सहायता लेनी पड़ती है। नए नियम से उनका स्थायी निवास का सपना टूट सकता है। आव्रजन विशेषज्ञों का कहना है कि नियमों की भाषा अस्पष्ट है। ‘सरकारी मदद’ की परिभाषा में राज्यों के अपने कार्यक्रम भी आ सकते हैं, जिससे भ्रम बढ़ेगा। वकील सलाह दे रहे हैं कि आवेदक हर दस्तावेज़ सुरक्षित रखें और कानूनी सलाह लें। भारतीय समुदाय के संगठनों ने इस पर कड़ा विरोध जताया है। उनका तर्क है कि कर चुकाने वाले प्रवासियों को अस्थायी सहायता के लिए दंडित करना अनुचित है। उधर, USCIS का कहना है कि नियम केवल आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले वर्ष लगभग 1.2 लाख भारतीय ग्रीन कार्ड आवेदन लंबित थे। नए नियम से इनमें से कई को अतिरिक्त दस्तावेज़ जमा करने पड़ सकते हैं, जिससे प्रक्रिया और लंबी होगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में मेडिकेड और SNAP के लाभार्थियों में भारतीय मूल के लोगों की हिस्सेदारी करीब 3 प्रतिशत थी। यह संख्या छोटी लगती है, लेकिन H‑1B वीजा धारकों के परिवारों पर असर बड़ा हो सकता है। आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने आय प्रमाण, टैक्स रिटर्न, बीमा पॉलिसी और नौकरी के अनुबंध की प्रति तैयार रखें। किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने से पहले कानूनी सलाह लेना समझदारी होगी। मामला अदालतों में भी जा सकता है। तब तक भारतीय आवेदक सतर्क रहें, अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत रखें और नियमों में बदलाव पर नज़र रखें। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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