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अमेरिकी संसद में भारतवंशी सांसद ने दी अपनी पार्टी को चुनौती, रूसी तेल पर भारत पर प्रतिबंध का किया समर्थन

18/9/2026, 4:46:26 am
अमेरिकी संसद में भारतवंशी सांसद ने दी अपनी पार्टी को चुनौती, रूसी तेल पर भारत पर प्रतिबंध का किया समर्थन
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अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में भारतीय मूल के एक सांसद ने अपनी ही पार्टी के रुख के खिलाफ जाकर वोट डाला है। मामला रूस से तेल खरीदने पर भारत के खिलाफ प्रतिबंध लगाने के एक प्रस्ताव से जुड़ा है। इस सांसद ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जिससे भारतीय कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सांसद का नाम राजा कृष्णमूर्ति है। वे इलिनॉय से डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर चुने गए हैं। बुधवार को सदन में एक संशोधन पेश किया गया था, जिसमें कहा गया था कि रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका प्रतिबंध लगाए। भारत ऐसा ही एक प्रमुख खरीदार है। कृष्णमूर्ति ने इस संशोधन का समर्थन किया, जबकि उनकी पार्टी के अधिकांश सदस्यों ने इसका विरोध किया। व्हाइट हाउस और विदेश मंत्रालय पहले ही साफ कर चुके हैं कि भारत पर प्रतिबंध लगाना अमेरिका के रणनीतिक हित में नहीं है। भारत अमेरिका का महत्वपूर्ण साझेदार है, खासकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन को संतुलित करने के लिहाज से। इसके बावजूद कृष्णमूर्ति ने तर्क दिया कि रूस की युद्ध मशीन को धन मुहैया कराने वाले किसी भी देश को छूट नहीं मिलनी चाहिए। भारत ने यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस से तेल आयात कई गुना बढ़ा दिया है। सस्ता रूसी तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद साबित हुआ है। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने बार-बार भारत से खरीद घटाने को कहा, लेकिन नई दिल्ली ने साफ कर दिया कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है। विदेश मंत्री एस जयशंकर कई बार कह चुके हैं कि भारत अपने राष्ट्रीय हित के हिसाब से फैसले लेगा। कृष्णमूर्ति के इस कदम को भारतीय-अमेरिकी समुदाय के एक वर्ग का समर्थन मिला है, जो मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुद्दे पर सख्त रुख चाहते हैं। मगर कई विश्लेषक इसे प्रतीकात्मक मानते हैं, क्योंकि संशोधन पारित होने की संभावना कम है। सीनेट में भी इसे मंजूरी मिलनी मुश्किल है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। जानकारों का कहना है कि एक सांसद का वोट द्विपक्षीय संबंधों की दिशा नहीं बदलता। अमेरिका-भारत साझेदारी रक्षा, तकनीक और व्यापार जैसे कई मोर्चों पर गहरी हो रही है। इस घटना से इतना जरूर पता चलता है कि अमेरिकी घरेलू राजनीति में भारत के रणनीतिक विकल्पों पर सवाल उठते रहेंगे। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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