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अमेरिका की नई योजना: माता‑पिता को घर पर बच्चे पालने के लिए प्रोत्साहन, डे‑केयर पर निर्भरता घटाने का प्रयास
7/9/2026, 4:15:26 am

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अमेरिका में अब सरकार मान रही है कि बच्चों की परवरिश माता‑पिता ही बेहतर कर सकते हैं और डे‑केयर केंद्रों पर निर्भरता कम करना ज़रूरी है। नई राष्ट्रीय योजना के तहत परिवार को आर्थिक और सामाजिक सहारा देकर घर पर ही देखभाल को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
व्हाइट हाउस ने बयान जारी कर कहा कि मजबूत पारिवारिक इकाइयाँ लंबे समय में समाज की उत्पादकता बढ़ाती हैं। योजना में टैक्स क्रेडिट, लचीली माता‑पिता की छुट्टी और घर पर देखभाल के लिए सीधी नकद सहायता शामिल है, ताकि अभिभावक नौकरी और बच्चे की ज़रूरतों के बीच संतुलन बना सकें।
श्रम मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि यह कदम खासकर उन मध्यम वर्गीय परिवारों को लक्ष्य करता है जो डे‑केयर की ऊंची फीस वहन नहीं कर पाते। नई नीति में राज्यों को अपने बजट में बच्चों की देखभाल के लिए अतिरिक्त राशि रखने का निर्देश दिया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर सुविधाएं सुधरें।
बाल विकास विशेषज्ञों ने इस पहल का स्वागत किया, लेकिन साथ ही चेताया कि गरीब और एकल अभिभावक परिवारों को पर्याप्त वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए, वरना वे फिर से डे‑केयर पर निर्भर हो जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही ज़रूरी है।
योजना के पहले चरण में अगले वित्त वर्ष से टैक्स क्रेडिट और नकद सहायता लागू होगी, जबकि लचीली छुट्टी का प्रावधान अगले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से आएगा। सरकार ने हर छह महीने में प्रगति की समीक्षा करने और जरूरी सुधार करने का वादा किया है, ताकि लक्ष्य समय पर पूरे हों।
विपक्षी दलों ने इस योजना को राजनीतिक लाभ के लिए चुनावी वादा बताया, लेकिन अधिकांश मतदाताओं ने सर्वेक्षण में पारिवारिक सहायता को प्राथमिकता दी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि क्रियान्वयन पारदर्शी रहा तो अमेरिकी समाज में बच्चों की देखभाल का ढांचा स्थायी रूप से बदल सकता है।
पहले चरण में दस राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे, जहां परिवारों को सीधे नकद हस्तांतरण और मुफ्त पेरेंटिंग वर्कशॉप मिलेंगी। इन राज्यों के आंकड़े राष्ट्रीय स्तर पर नीति को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल होंगे, जिससे भविष्य में योजना का विस्तार सुगम हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक लाभ में शिशु मृत्यु दर में कमी, स्कूली प्रदर्शन में सुधार और महिला श्रम भागीदारी में वृद्धि शामिल हैं। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि बिना मजबूत निगरानी तंत्र के धन का दुरुपयोग हो सकता है, इसलिए पारदर्शी ऑडिट व्यवस्था अनिवार्य है।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
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