क्रिकेट
जब विवियन ने पूछी गेंद का वजन, गांगुली ने वॉ को तड़पाया और मियांदाद की निकली हेकड़ी — क्रिकेट के 3 मजेदार अनसुने किस्से
10/9/2026, 2:26:47 am

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क्रिकेट मैदान पर सिर्फ रन बनाना या विकेट लेना नहीं होता, अक्सर खिलाड़ियों के बीच चलने वाली जुबानी जंग भी खेल का रोचक हिस्सा बन जाती है। कई बार एक ही शब्द या सवाल सामने वाले को सोच में डाल देता है और वो अपनी लय खो बैठता है। आज हम ऐसे तीन किस्से सुनाते हैं जो कम ही लोगों ने सुने हैं, लेकिन उनमें हंसी और सबक दोनों भरे पड़े हैं।
पहला किस्सा वेस्ट इंडीज के महान बल्लेबाज सर विवियन रिचर्ड्स से जुड़ा है। 1984 में इंग्लैंड के खिलाफ एक टेस्ट मैच के दौरान, रिचर्ड्स ने गेंदबाज़ से अचानक पूछ लिया कि इस गेंद का वजन कितना है? गेंदबाज़ हैरान रह गया क्योंकि वो कभी इस सवाल का जवाब देने की आदत नहीं रखता था। विवियन ने मुस्कुराते हुए कहा, “अगर तुम इसका वजन नहीं जानते तो मैं इसे कैसे मारूँगा?” इस अजीबोगरीब सवाल से गेंदबाज़ का ध्यान भटक गया और अगली गेंद पर रिचर्ड्स ने चौका जड़ दिया। दर्शकों ने इस पल को यादगार माना।
दूसरा किस्सा भारतीय कप्तान सौरभ गांगुली और ऑस्ट्रेलियाई स्टार स्टीव वॉ से संबंधित है। 2001 की बॉर्डर-गावस्कर सीरीज़ के एक मैच में, गांगुली ने वॉ को गेंदबाज़ी करते हुए धीरे से कहा, “तुम आज अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे पाओगे, क्योंकि तुम्हारी टेकनीक थोड़ी पुरानी हो गई है।” ये शब्द वॉ के कानों में इस तरह घुसे कि वो अगले ओवर में दो 연속 विकेट गंवा बैठे। बाद में वॉ ने स्वीकार किया कि गांगुली की ये टिप्पणी मानसिक दबाव बन गई और वो अपना सामान्य खेल नहीं खेल पाए।
तीसरा किस्सा पाकिस्तान के धाकड़ बल्लेबाज़ जावेद मियांदाद से जुड़ा है। 1992 वर्ल्ड कप के एक मैच में, मियांदाद ने भारतीय गेंदबाज़ को चिढ़ाते हुए कहा, “तुम मेरी गेंद को नहीं पढ़ सकते, इसलिए मैं आज छक्का मारूंगा।” भारतीय गेंदबाज़ ने इस पर हँसी का जवाब देते हुए कहा, “अगर तुम इतना 확신 रखते हो तो फिर क्यों नहीं पहले से बताते?” मियांदाद का viso red हो गया और उसने अगली गेंद पर बल्ला फसला दिया, जिससे विकेट गिर गया। इस घटना ने दिखाया कि overexcitement कभी‑कभी खिलाड़ी को महंगा पड़ सकता है।
ये तीन किस्से बताते हैं कि sledging सिर्फ अपशब्दों तक सीमित नहीं होता, कभी‑कभी एक साधारण सवाल या टिप्पणी भी मनोवैज्ञानिक लाभ दे देता है। मैदान पर ऐसा माहौल बनाकर खिलाड़ी खुद को तैयार रखते हैं, लेकिन सीमा भी जाननी चाहिए ताकि खेल की भावना बनी रहे। अंत में याद रखें, क्रिकेट में जीत और हार दोनों का मज़ा तभी आता है जब हम respeक्ट के साथ खेलें।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — क्रिकेट
समाचार स्रोत: अमर उजाला — क्रिकेट
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