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वोटर लिस्ट से नाम कटने का डर: SIR प्रक्रिया पर उठे सवाल

13/9/2026, 5:13:15 am
वोटर लिस्ट से नाम कटने का डर: SIR प्रक्रिया पर उठे सवाल
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चुनाव आयोग ने हाल में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR शुरू किया है। मकसद वोटर लिस्ट को दुरुस्त करना है। लेकिन, इस कवायद ने कई राज्यों में बेचैनी बढ़ा दी है। असम, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में खासकर चिंता है। अधिकारियों का कहना है कि SIR के तहत बूथ लेवल अफसर घर-घर जाकर ब्यौरा जांच रहे हैं। जो मतदाता मिल नहीं रहे, जिनके पते बदले हैं या जिनके कागजात पूरे नहीं, उनके नाम हटाए जा सकते हैं। आयोग का दावा है कि यह नियमित सफाई है। मगर, सामाजिक कार्यकर्ता और विपक्षी दल इसे अलग नजर से देख रहे हैं। उनका आरोप है कि खास समुदायों और सीमावर्ती इलाकों के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। असम में NRC की कवायद के बाद SIR को उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि वोटर लिस्ट से नाम काटने का आधार सिर्फ निवास नहीं हो सकता। नागरिकता कानून के तहत नागरिकता साबित करने का बोझ राज्य पर है, नागरिक पर नहीं। SIR की प्रक्रिया इस सिद्धांत को उलटती दिखती है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी का नाम हटाने से पहले नोटिस दिया जाएगा। सुनवाई का मौका मिलेगा। लेकिन, जमीनी हकीकत में कई लोगों को नोटिस ही नहीं मिल पाता। भाषा और साक्षरता की बाधा अलग है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने कहा कि पारदर्शिता जरूरी है। आयोग को यह बताना चाहिए कि किन आधारों पर नाम काटे जा रहे हैं। डेटा सार्वजनिक हो ताकि भरोसा कायम रहे। फिलहाल, मामला अदालतों में भी पहुंच रहा है। गुवाहाटी हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट से भी दखल की मांग हो रही है। नतीजा जो भी हो, एक बात साफ है — वोटर लिस्ट की सफाई और नागरिकता की परीक्षा, दोनों अलग-अलग चीजें हैं। इन्हें घालमेल करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है।
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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