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नदियों को कानूनी अधिकार देने से क्या बदलेगा?

7/9/2026, 1:20:25 pm
नदियों को कानूनी अधिकार देने से क्या बदलेगा?
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दुनिया में पर्यावरण की चिंता बढ़ने के साथ ही नदियों को इंसानों की तरह कानूनी दर्जा देने की बात चल पड़ी है। इस विचार के अनुसार नदी को सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि एक ऐसा जीवित अस्तित्व माना जाता है जो अपने अधिकारों की रक्षा कर सके। इसके तहत कोई भी व्यक्ति या संस्था नदी के खिलाफ प्रदूषण या अवैध खनन करने पर अदालत में मुकदमा दर्ज करा सकता है, और नदी की ओर से एक अभिभावक नियुक्त किया जाता है जो उसके हितों की पैरवी करता है। पहला सफल उदाहरण न्यूजीलैंड का व्हांगुई नदी है, जिसे 2017 में कानूनी व्यक्ति का दर्जा दिया गया। स्थानीय माओरी समुदाय और सरकार ने मिलकर Te Awa Tupua कानून बनाया, जो नदी को एक अटूट और जीवित entirety के रूप में मानता है। इसी तरह इक्वाडोर ने 2008 में अपने संविधान में प्रकृति के अधिकारों को जगह दी, जिसके तहत उसकी नदियों को भी संरक्षण मिलता है। भारत में भी इस दिशा में प्रयास हुए। 2017 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गंगा और यमुना को कानूनी व्यक्ति का दर्जा दे दिया था, हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को रोक दिया था। मुख्य उद्देश्य था नदियों के प्रदूषण को रोकना और उनके संरक्षण को मजबूत बनाना। यदि इस विचार को अमल में लाया जाता है तो सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि उद्योग, कचरा निपटान और अवैध खनन जैसी गतिविधियों पर सीधा कानूनी लगाम लगाया जा सकेगा। नदी के प्रतिनिधि क्षतिपूर्ति की मांग कर सकते हैं और पर्यावरणीय नुकसान के लिए जिम्मेदार पक्षों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है। लेकिन इस राह में कई बाधाएं भी हैं। सबसे पहले सवाल यह है कि नदी के हितों की परिभाषा कौन करेगा? अक्सर स्थानीय समुदायों की आजीविका और बड़े बांध या औद्योगिक परियोजनाओं के बीच टकराव पैदा हो जाता है। अभिभावक की नियुक्ति, उसके कर्तव्यों की स्पष्टता और कानूनी प्रक्रिया की लागत भी चिंता का विषय है। साथ ही, कई राज्यों में जल अधिकार जटिल और विवादित होते हैं, ऐसे में नए कानूनी फ्रेमवर्क को लागू करना आसान नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस विचार को समुदाय की सहभागिता के साथ धीरे-धीरे अपनाया जाए तो यह पारिस्थितिकी संरक्षण का एक मज़बूत उपकरण बन सकता है। कानूनी अधिकार नदी को सिर्फ संसाधन नहीं, बल्कि एक संरक्षित अस्तित्व के रूप में स्थापित करेंगे, जिससे भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ और बहते जल का अधिकार मिल सकेगा। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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