विश्व
ट्रंप की सबसे भरोसेमंद सहयोगी नताली हार्प कौन हैं?
21/8/2026, 2:46:50 am

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व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप की सबसे करीबी सहयोगी नताली हार्प इन दिनों चर्चा में हैं।
डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन ऑसॉफ़ ने हाल के एक भाषण में कहा कि ट्रंप नताली पर बहुत भरोसा करते हैं और उन्हें अहम फैसलों में शामिल रखते हैं।
नताली हार्प का जन्म 1990 के दशक में हुआ था और उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक स्थानीय अखबार से की और फिर फॉक्स न्यूज़ में रिपोर्टर और प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया।
फॉक्स न्यूज़ में वे ‘द फॉक्स न्यूज़ शो’ के लिए राजनीतिक विश्लेषण लिखती थीं और ट्रंप के भाषणों का लाइव कवरेज करती थीं।
इस दौरान उन्होंने ट्रंप के समर्थकों की भाषा, उनके मुद्दे और सोशल मीडिया की रणनीति को गहराई से समझा।
2020 के चुनाव में नताली ट्रंप की डिजिटल टीम की प्रमुख सदस्य बनीं और ऑनलाइन अभियान की पूरी रणनीति तैयार की।
उनकी तेज़ लिखाई और ट्रंप के बोलने के अंदाज़ को पकड़ने की क्षमता ने उन्हें जल्दी ही विश्वसनीय बना दिया।
सीनेटर ऑसॉफ़ ने कहा कि नताली को ट्रंप के ‘आंतरिक सर्कल’ में जगह मिली क्योंकि वे बिना किसी सवाल के ट्रंप के निर्देशों को लागू करती हैं।
ऑसॉफ़ के अनुसार यह भरोसा राजनीतिक रणनीति से ज्यादा व्यक्तिगत वफादारी पर टिका है।
व्हाइट हाउस के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि नताली अब राष्ट्रपति के दैनिक ब्रीफिंग नोट्स तैयार करती हैं, मीडिया के सवालों का जवाब देती हैं और कई बार ट्रंप के ट्वीट भी लिखती हैं।
उनकी मौजूदगी ने प्रशासन की संचार रणनीति को अधिक तेज़, सीधा और लक्षित बना दिया है।
कई विश्लेषकों का मानना है कि नताली की भूमिका पारंपरिक प्रेस सचिव से आगे निकल चुकी है क्योंकि वे सीधे राष्ट्रपति के संदेश को आकार देती हैं।
उनके कामकाज पर मीडिया की नज़र भी है क्योंकि वे अक्सर विवादित बयानों को बिना संपादन के जारी करती हैं।
ट्रंप के समर्थक उन्हें ‘व्हाइट हाउस की आवाज़’ कहते हैं, जबकि आलोचक उन्हें ‘सत्ता की छाया’ मानते हैं।
इस बीच, विपक्षी दलों ने नताली की नियुक्ति को पारदर्शिता की कमी का उदाहरण बताया है।
फिर भी, व्हाइट हाउस के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि नताली की योग्यता और अनुभव ही उनकी पदोन्नति का आधार हैं।
नताली ने यूनिवर्सिटी ऑफ मिसौरी से जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री ली और फिर एक छोटे न्यूज़ रूम में इंटर्नशिप की।
उनके पिता एक छोटे कारोबारी थे और माँ स्कूल टीचर, जिससे उन्हें मध्यम वर्ग की चिंताओं को समझने का मौका मिला।
उन्होंने 2015 में ट्रंप के अभियान में स्वयंसेवक के रूप में काम करना शुरू किया और जल्द ही पेशेवर भूमिका में आ गईं।
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
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