लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
विश्व

नेपाल की बाढ़: भारत के लिए क्यों है चेतावनी?

3/9/2026, 2:59:34 am
नेपाल की बाढ़: भारत के लिए क्यों है चेतावनी?
Original publisher image
नेपाल के मध्य और पूर्वी इलाके में पिछले हफ्ते लगातार भारी बारिश हुई, जिससे कोसी, गंडकी और महाकाली जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया। बाढ़ ने सैकड़ों गाँवों को डुबो दिया, सड़कों, पुलों और बिजली लाइनों को क्षतिग्रस्त कर दिया तथा हजारों लोगों को अस्थायी आश्रयों में भेजना पड़ा। यह पानी दक्षिण की ओर बहकर भारतीय सीमा में प्रवेश करता है। दोनों देश एक ही हिमालयी नदी व्यवस्था साझा करते हैं — ये नदियाँ नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों से निकलकर बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के मैदानों में मिलती हैं। जब उपग्रहों में बर्फ का पिघलना तेज़ होता है या अतिवर्षा होती है, तो निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी ग्लेशियर पिछले दशक में पहले से तेज़ी से पिघल रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप नदियों में जल प्रवाह का पैटर्न अनियमित हो रहा है — कभी सूखा, कभी अचानक भारी बहाव। यह अस्थिरता पर्यावरण के साथ‑साथ बुनियादी ढाँचे, खेती और आबादी को भी खतरे में डालती है। भारत के लिए यह चिंता का विषय इसलिए है क्योंकि बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल हर साल इन नदियों के पानी से सिंचाई, पीने का पानी और जलविद्युत लेते हैं, लेकिन बाढ़ की स्थिति में वही पानी विनाशकारी बन जाता है। पिछले कुछ वर्षों में बाढ़ ने हजारों एकड़ फसल नष्ट की, घर ढहाए और राहत‑पुनर्वास पर सरकारी खर्च बढ़ा दिया। इस समस्या का हल केवल एक देश के प्रयासों से नहीं निकल सकता। दोनों देशों को मौसम और नदी डेटा साझा करना होगा, संयुक्त early‑warning प्रणाली बनानी होगी और बाँध‑नियंत्रण समझौतों को अद्यतन करना होगा। सामुदायिक स्तर पर भी जागरूकता और त्वरित निकासी योजनाएँ ज़रूरी हैं। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

संबंधित