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विश्व

रूस ने 1998 में भारत को BRICS का विचार क्यों दिया?

11/9/2026, 5:28:16 am
रूस ने 1998 में भारत को BRICS का विचार क्यों दिया?
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12 सितंबर 2026 से शुरू हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन के पीछे की कहानी को समझना दिलचस्प है। 1998 में भारत ने Pokhran में परमाणु परीक्षण किया। इसके बाद दुनिया में अमेरिका और यूरोप का वर्चस्व बढ़ता दिखा। रूस के तत्कालीन विदेश मंत्री येफगेनी प्रिमाकोव ने भारत के सामने एक नया विचार रखा: बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच पर लाकर वैश्विक संतुलन बनाया जा सकता है। उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन को एक साथ लाने की बात की, हालांकि तब इसका कोई आधिकारिक नाम नहीं था। भारत ने इस प्रस्ताव को सोच समझकर देखा। उस समय भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना चाहता था और किसी भी固定 블ॉक में बंधने से बचता था। लेकिन प्रिमाकोव की बहु‑ध्रुवीय दुनिया की सोच ने भारतीय नीति‑निर्माताओं को इस बात पर विचार करने को मजबूर किया कि ऐसा मंच आर्थिक और राजनीतिक लाभ दे सकता है। इस बीच 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने एक रिपोर्ट निकाली। उन्होंने अक्षरश: BRIC शब्द का इस्तेमाल करते हुए ब्राजील, रूस, भारत और चीन की बढ़ती आर्थिक शक्ति को उजागर किया। ओ'नील की थ्योरी ने इन चार देशों को एक आर्थिक bloc के रूप में पहचान दी और वैश्विक चर्चा में उनका वजन बढ़ा। ओ'नील के शब्द ने रूस के पहले के विचार को एक ठोस फ्रेमवर्क दिया। 2006 में न्यूयॉर्क में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक हुई। वहां trade, investment और energy जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इसके बाद 2009 में येकेटेरिनबर्ग में पहला आधिकारिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया। इस बैठक ने समूह की नींव रखी और नियमित वार्षिक बैठकों की शुरुआत की। 2010 में दक्षिण अफ्रीका को जोड़कर ब्रिक्स से ब्रिक्स बन गया। अब पांच देशों का यह समूह वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। रूस की 1998 की पहल और जिम ओ'नील की थ्योरी दोनों मिलकर आज के ब्रिक्स को आकार दिया है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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