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महिलाओं को माइग्रेन ज़्यादा क्यों? कारण और बचाव के उपाय

8/9/2026, 5:05:41 am
महिलाओं को माइग्रेन ज़्यादा क्यों? कारण और बचाव के उपाय
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महिलाओं को माइग्रेन के दौरे पुरुषों के मुक़ाबले लगभग दोगुने मिलते हैं। शोध बताते हैं कि एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन दिमाग़ की संवेदनशीलता बढ़ाते हैं। मासिक चक्र, गर्भावस्था और मीनोपॉज़ के दौरान हार्मोन का स्तर तेज़ी से बदलता है, जिससे माइग्रेन का खतरा बढ़ जाता है। आनुवंशिक कारक भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। अगर माँ या बहन को माइग्रेन है, तो बेटी को भी होने की संभावना अधिक रहती है। दिमाग़ में न्यूरोट्रांसमीटर का असंतुलन दर्द के संकेतों को तेज़ कर देता है। ट्रिगर की पहचान करना बचाव का पहला कदम है। तेज़ रोशनी, तेज़ आवाज़, नींद की कमी, तनाव और कुछ खाद्य पदार्थ जैसे चॉकलेट, पनीर या रेड वाइन दौरे भड़का सकते हैं। रोज़ाना नियमित नींद, संतुलित आहार और पर्याप्त पानी पीने से आवृत्ति कम होती है। दवा के अलावा जीवनशैली में बदलाव असरदार साबित हुए हैं। योग, ध्यान और हल्की एरोबिक एक्सरसाइज़ तनाव घटाते हैं। कुछ महिलाओं को हार्मोन थेरेपी या गर्भनिरोधक गोलियों में बदलाव से राहत मिली है, लेकिन डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है। अगर दौरे बार‑बार आएं या दर्द असहनीय हो, तो न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें। सही निदान और व्यक्तिगत उपचार योजना से जीवन की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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