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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: शी जिनपिंग के आने पर चीन की चुप्पी, भारत ने नहीं छोड़ी अहम मांग

10/9/2026, 4:59:38 am
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: शी जिनपिंग के आने पर चीन की चुप्पी, भारत ने नहीं छोड़ी अहम मांग
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा। चीन ने अब तक शी जिनपिंग के आने की पुष्टि नहीं की है। भारत ने सीमा विवाद पर अपनी मुख्य मांग — वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बहाली — को दोहराया है। लेकिन चीनी पक्ष ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। पिछले साल गलवान घाटी में झड़प के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा। भारत ने सैन्य तैनाती बढ़ाई और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रखी। चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि “सभी पक्षों की सहमति से ही नेताओं की उपस्थिति तय होगी।” यह वाक्य अस्पष्टता बढ़ाता है। विश्लेषकों का मानना है कि चीन अपनी घरेलू राजनीति और आर्थिक चुनौतियों के कारण शी जिनपिंग को विदेश यात्रा से रोक रहा है। साथ ही वह भारत पर दबाव बनाना चाहता है। भारत ने स्पष्ट किया कि शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए किसी भी नेता की उपस्थिति शर्त नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “हम सहयोग के लिए तैयार हैं, लेकिन अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेंगे।” शिखर सम्मेलन के एजेंडे में आर्थिक सहयोग, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद विरोधी कदम शामिल हैं। शी जिनपिंग की अनुपस्थिति इन मुद्दों पर चर्चा को प्रभावित कर सकती है। पिछले ब्रिक्स सम्मेलनों में शी जिनपिंग ने व्यक्तिगत रूप से भाग लिया था। 2023 में जोहान्सबर्ग में उनकी उपस्थिति ने चीन की सक्रियता दिखाई थी। इस बार अनुपस्थिति एक नया संकेत दे रही है। भारत और चीन के बीच व्यापार 2023 में 135 अरब डॉलर को पार कर गया। फिर भी सीमा मुद्दे पर प्रगति धीमी है। विशेषज्ञ कहते हैं कि आर्थिक लाभ राजनीतिक तनाव को पूरी तरह ढक नहीं सकते। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में कहा कि “हम बातचीत के रास्ते खुले रखेंगे, लेकिन किसी भी समझौते में भारत की सुरक्षा प्राथमिकता रहेगी।” यह बयान भारत के रुख को मजबूत करता है। अब देखना होगा कि चीन अंतिम समय में पुष्टि करता है या नहीं। दोनों पक्षों के रुख से आगे की द्विपक्षीय संबंधों की दिशा तय होगी। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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