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1942 में बेतिया की मशीनगन फायरिंग: शहीदों को नमन

25/8/2026, 12:00:00 am
1942 में बेतिया की मशीनगन फायरिंग: शहीदों को नमन
1942 में बेतिया में अंग्रेजी फौज ने मशीनगन से गोलियाँ चलाईं। यह घटना भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान हुई जब स्थानीय लोग आज़ादी की माँग लेकर सड़कों पर उतरे थे। ब्रिटिश अफ़सरों ने बिना किसी चेतावनी के भीड़ पर फायरिंग शुरू कर दी। कई नौजवान, किसान और महिलाएँ मौके पर ही शहीद हो गए। शहर की गलियों में खून की धार बह गई और लोग भयभीत हो गए। आज भी बेतिया के लोग उस दिन को याद करते हैं और शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं। हर साल 9 अगस्त को शहर के मुख्य चौक पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाती है। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और नेता मिलकर मौन रखते हैं और फूल चढ़ाते हैं। स्थानीय विधायक और सांसद भी इस अवसर पर भाषण देते हैं। स्थानीय प्रशासन ने शहीद स्मारक का निर्माण कराया है जिस पर सभी शहीदों के नाम अंकित हैं। इस स्मारक के पास एक छोटा संग्रहालय भी है जहाँ उस दौर की तस्वीरें, पत्र और दस्तावेज़ रखे गए हैं। इतिहासकार बताते हैं कि बेतिया की यह घटना बिहार में अंग्रेजी दमन का एक बड़ा उदाहरण है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में आंदोलन और तेज़ हुआ। लोग आज भी उस साहस को याद करके प्रेरणा लेते हैं। नई पीढ़ी को इतिहास की यह कड़ी बताने के लिए स्कूलों में विशेष कक्षाएँ भी चलाई जाती हैं। कई शोधकर्ता इस घटना पर किताबें लिख चुके हैं। समाचार स्रोत: Google News — Bettiah (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bettiah (Hindi)

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