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पुणे से 20 कंपनियों का पलायन, 5000 नौकरियों पर संकट: आदित्य ठाकरे

16/8/2026, 1:28:01 am
पुणे से 20 कंपनियों का पलायन, 5000 नौकरियों पर संकट: आदित्य ठाकरे
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पुणे के एमआईडीसी क्षेत्र से बीस कंपनियों ने अपने कारखाने दूसरी जगह ले जाने की तैयारी शुरू कर दी है। ये इकाइयाँ विनिर्माण, आईटी सेवाएँ और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों से जुड़ी हैं। सूत्रों के अनुसार इन कंपनियों ने गुजरात के अहमदाबाद और मध्य प्रदेश के इंदौर को नए ठिकाने के रूप में चुना है। मुख्य वजह उत्पादन लागत बढ़ना, जमीन का किराया महँगा होना और कुशल श्रमिकों की कमी बताई जा रही है। पुणे के एमआईडीसी में बुनियादी सुविधाओं की कमी, बार‑बार ट्रैफिक जाम और बिजली की अनियमित आपूर्ति भी उद्यमियों को सोचने पर मजबूर कर रही है। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने इस मुद्दे पर बयान दिया कि अगर ये कंपनियाँ वास्तव में पुणे छोड़ देती हैं तो लगभग पाँच हज़ार कर्मचारियों की रोज़ी‑रोटी पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को तुरंत कदम उठाने की ज़रूरत है ताकि उद्योगों को आकर्षित करने वाले प्रोत्साहन पैकेज फिर से जीवित किए जा सकें और बुनियादी ढाँचे में सुधार लाया जा सके। ठाकरे ने आगे बताया कि वे उद्योग संघों के प्रतिनिधियों, श्रम विभाग, एमआईडीसी अधिकारियों और स्थानीय विधायकों के साथ बैठक कर समस्या का हल निकालेंगे। उनके मुताबिक यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो पुणे का औद्योगिक मानचित्र बदल सकता है और इससे राज्य की राजस्व आय पर भी असर पड़ सकता है। कर्मचारी संगठनों ने भी चिंता जताई है और माँग की है कि सरकार जल्द से जल्द ठोस नीति घोषित करे ताकि नौकरियाँ बचाई जा सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महाराष्ट्र सरकार ने बुनियादी सुविधाएँ दुरुस्त कीं और टैक्स छूट जैसे प्रोत्साहन दिए तो कंपनियाँ पुणे में ही रहना पसंद करेंगी। अगले कुछ सप्ताह में सरकार की ओर से ठोस कदम न उठाए गए तो पुणे से बड़े पैमाने पर औद्योगिक पलायन तय माना जा रहा है। उद्योग मंत्री ने कहा कि केंद्र की 'मेक इन इंडिया' योजना के तहत पुणे को विशेष आर्थिक क्षेत्र का दर्जा देने पर विचार किया जा रहा है, जिससे निवेशकों को टैक्स में राहत मिलेगी। साथ ही, राज्य सरकार ने एमआईडीसी के विस्तार के लिए 2,000 करोड़ रुपये का पैकेज घोषित किया है, ताकि सड़क, बिजली और पानी की आपूर्ति दुरुस्त हो सके। हालांकि, उद्योगपतियों का कहना है कि केवल पैकेज घोषित करने से काम नहीं चलेगा, ज़मीनी स्तर पर तेज़ी से क्रियान्वयन ज़रूरी है। अगर ये उपाय समय पर लागू हुए तो पुणे अपने औद्योगिक दर्जे को बचाए रख सकेगा और लाखों श्रमिकों की आजीविका सुरक्षित रहेगी। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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