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अमेरिका ने मान लिया: अंतरिक्ष में तैनात हैं हथियार, दुश्मन के सैटेलाइट को कर सकते हैं निशाना

15/9/2026, 3:28:12 am
अमेरिका ने मान लिया: अंतरिक्ष में तैनात हैं हथियार, दुश्मन के सैटेलाइट को कर सकते हैं निशाना
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अमेरिका की रक्षा एजेंसियों ने हाल ही में एक बयान जारी कर कहा कि उसकी कक्षा में कई प्रकार के हथियार मौजूद हैं। इनमें दिशा‑निर्देशित ऊर्जा हथियार और kinetic kill vehículos शामिल हैं। यह स्वीकार पहले कभी आधिकारिक स्तर पर नहीं किया गया था। बयान के अनुसार, इन हथियारों का मुख्य उद्देश्य दुश्मन देशों के संचार, नेविगेशन और जासूसी उपग्रहों को अक्षम करना है। यदि आवश्यक पड़ा तो ये उपग्रहों को ध्वस्त कर सकते हैं या उनके कामकाज में बाधा डाल सकते हैं। इससे दुश्मन की युद्ध क्षमता पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की क्षमता अंतरिक्ष को एक नए युद्ध के मैदान में बदल देती है। पहले अंतरिक्ष को शांतिपूर्ण वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र माना जाता था, लेकिन अब सैन्य इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे अंतरिक्ष संधियों की प्रभावशीलность पर भी सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका की इस घोषणा के बाद चीन और रूस ने तुरंत प्रतिक्रिया दी है। दोनों देशों ने कहा कि वे भी अपनी कक्षा में समान क्षमताएं विकसित कर रहे हैं और अंतरिक्ष में शांति बनाए रखने के लिए बातचीत की आवश्यकता पर जोर दिया है। हालांकि, उनके बयानों में सतर्कता भी देखी जा रही है। अंतरिक्ष कानून विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा Outer Space Treaty (1967) में हथियारों के प्रयोग पर स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है, जिससे देशों को इस क्षेत्र में सैन्य विकास करने की छूट मिलती है। हालांकि, ट्रीटि का उद्देश्य शांतिपूर्ण उपयोग बनाए रखना रहा है, जिसे अब चुनौती मिल रही है। भारत ने भी अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं में वृद्धि की है और हाल ही में एसएटी‑सिक्योरिटी मिशन लॉन्च किया है। भारतीय अधिकारी कहते हैं कि उनका फोकस रक्षात्मक क्षमताओं पर है और वे किसी भी प्रकार के अंतरिक्ष युद्ध में भाग नहीं लेना चाहते। फिर भी, वे अपनी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ा रहे हैं। अंतरिक्ष में हथियारों की मौजूदगी से वैश्विक स्तर पर नई रणनीतिक स्थिरता की बात हो रही है। कुछ विश्लेषक मानते हैं कि स्पष्ट नियम‑निर्माण और पारदर्शी संवाद से टकराव को टाला जा सकता है, जबकि अन्य चेतावनी देते हैं कि इस दिशा में अनियंत्रित दौड़ खतरनाक साबित हो सकती है। अंत में, अमेरिका की इस स्वीकृति ने अंतरिक्ष नीति निर्माताओं, सैन्य रणनीतिकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सामने एक महत्वपूर्ण प्रश्न रखा है: कैसे शांतिपूर्ण उपयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाया जाए? आने वाले महीनों में इस पर बहस तेज होने की उम्मीद है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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