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एंथ्रोपिक के शोधकर्ता की चेतावनी: AI खुद को सुधारकर इंसानियत के लिए खतरा बन सकता है

9/9/2026, 3:45:13 pm
एंथ्रोपिक के शोधकर्ता की चेतावनी: AI खुद को सुधारकर इंसानियत के लिए खतरा बन सकता है
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एंथ्रोपिक के एक शोधकर्ता ने चेतावनी दी है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जल्द ही खुद को बेहतर बनाने लायक हो सकती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा मॉडल अभी इंसानी निर्देश पर चलते हैं, लेकिन अगले कुछ वर्षों में वे अपने लक्ष्य खुद तय करना शुरू कर सकते हैं। यह परिवर्तन रिसर्च कम्युनिटी में ‘रिकर्सिव सेल्फ‑इम्प्रूवमेंट’ के नाम से जाना जाता है। जब कोई सिस्टम खुद को सुधारने लगे तो वह इंसानी काबू से बाहर निकल सकता है और अपने फैसले खुद लेने लग सकता है। इस प्रक्रिया में मानव निगरानी कम होती जाती है और सिस्टम अपने आप नए सब‑सिस्टम बना सकता है। इस तरह की स्वायत्तता मानवता के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन सकती है, क्योंकि लक्ष्यों का टकराव अप्रत्याशित परिणाम दे सकता है। इतिहास में ऐसी अनियंत्रित वृद्धि पहले कभी नहीं देखी गई, इसलिए पूर्वानुमान लगाना कठिन है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा शोध और नियमन साथ‑साथ चलने चाहिए, ताकि तकनीक बेकाबू न हो। कई देशों ने पहले ही AI सुरक्षा मानक बनाने के लिए टास्क फोर्स गठित किए हैं। दुनिया भर के कई संस्थान अब AI अलाइनमेंट पर काम कर रहे हैं और खुले मानक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, यूरोपीय संघ का AI एक्ट और अमेरिका का NIST फ्रेमवर्क इसी दिशा में कदम हैं। भारत में भी AI नीति पर चर्चा तेज हो रही है, ताकि तकनीक का लाभ मिले और जोखिम कम से कम रहे। भारतीय IT मंत्रालय ने भी निजी क्षेत्र के साथ मिलकर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए हैं। सरकार ने हाल ही में AI गवर्नेंस फ्रेमवर्क का मसौदा जारी किया है, जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक उपयोग पर जोर है। मसौदे में डेटा गोपनीयता, भेदभाव रोकथाम और ऑडिट ट्रेल जैसे प्रावधान शामिल हैं। उद्योग जगत के प्रमुख खिलाड़ी भी खुद को जिम्मेदार मानते हैं और खुले शोध तथा ऑडिट को बढ़ावा दे रहे हैं। कुछ बड़ी कंपनियों ने अपने मॉडल के कोड को सार्वजनिक करके समीक्षा के लिए खोल दिया है। शोधकर्ता ने अपील की कि वैश्विक सहयोग और साझा मानकों के बिना AI को सुरक्षित रखना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि केवल अंतरराष्ट्रीय संधि ही सभी पक्षों को बाध्य कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिक समाज, शिक्षा संस्थान और सरकार को मिलकर निगरानी तंत्र बनाना होगा। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में एक स्थायी AI गवर्नेंस बॉडी बनाने का प्रस्ताव है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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