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अर्जेंटीना की तानाशाही: बरसों बाद मिली अपनी पहचान

23/8/2026, 5:00:54 am
अर्जेंटीना की तानाशाही: बरसों बाद मिली अपनी पहचान
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अर्जेंटीना में 1976 से 1983 तक चली सैन्य तानाशाही ने हजारों परिवारों को तबाह किया। उस दौर में सरकार विरोधियों को गायब कर दिया जाता था। गर्भवती महिलाओं को कैद करके उनके बच्चे पैदा होते ही छीन लिए जाते। उन बच्चों को सैन्य अफसरों या उनके करीबियों को दे दिया जाता। ऐसी ही एक कहानी है मारिया की, जिन्हें 40 साल बाद अपनी असली पहचान पता चली। मारिया जब पैदा हुईं, उनकी मां राजनीतिक कैदी थीं। जन्म के तुरंत बाद मारिया को उनसे अलग कर दिया गया। एक सैन्य परिवार ने उन्हें गोद ले लिया। मारिया बड़े होकर मानवाधिकार कार्यकर्ता बनीं। वे दूसरों की लड़ाई लड़ती रहीं, लेकिन अपनी कहानी नहीं जानती थीं। साल 2024 में 'अबुएलास दे प्लाजा दे मायो' (प्लाजा दे मायो की दादियां) संस्था ने उनसे संपर्क किया। इस संस्था की स्थापना 1977 में उन दादियों ने की थी जिनके पोते-पोतियां गायब कर दिए गए थे। डीएनए जांच से पता चला कि मारिया उन 130 से ज्यादा बच्चों में से एक हैं जिन्हें उनकी असली पहचान वापस मिली। मारिया कहती हैं, "मैंने बरसों तक किसी और के नाम से जिंदगी गुजारी। अब मुझे अपनी मां का नाम, अपनी जड़ें पता चली हैं। यह दर्द भरा है, लेकिन सच जानना जरूरी था।" उनकी मां तानाशाही के दौर में 'गायब' किए गए उन 30,000 लोगों में थीं जिनका आज तक कोई सुराग नहीं मिला। अर्जेंटीना में अब तक 130 से ज्यादा चुराए गए बच्चों की पहचान बहाल हुई है। मगर सैकड़ों अब भी अपनी जड़ें ढूंढ रहे हैं। मानवाधिकार संगठन लगातार दबाव डाल रहे हैं कि दोषियों को सजा मिले और गायब हुए लोगों का पता चले। मारिया की कहानी बताती है कि तानाशाही के जख्म कितने गहरे होते हैं — और सच सामने लाने में पीढ़ियां लग जाती हैं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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