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अरुण जेटली: मोदी के सबसे भरोसेमंद साथी की याद

24/8/2026, 11:35:38 am
अरुण जेटली: मोदी के सबसे भरोसेमंद साथी की याद
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अरुण जेटली का नाम भारतीय राजनीति में एक ऐसा चेहरा है जिसे हर कोई पहचानता है। 24 अगस्त 2019 को 66 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। छात्र राजनीति से शुरुआत करके वे देश के सबसे अहम मंत्रालयों तक पहुंचे। जेटली ने दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र नेता के रूप में पहचान बनाई। फिर वे भाजपा की युवा शाखा में सक्रिय हुए और जल्द ही पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने। 1999 में वे पहली बार राज्यसभा के सदस्य चुने गए। 2002 में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें राज्य का वित्त मंत्री बनाया। वहां उन्होंने आर्थिक सुधारों को तेज़ी से लागू किया। 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर जेटली को केंद्रीय वित्त मंत्री और फिर रक्षा मंत्री का पद मिला। उनकी कार्यशैली स्पष्ट और त्वरित फैसले लेने वाली थी। जीएसटी लागू करने में उनकी भूमिका निर्णायक रही। बैंकों के विलय, कर्ज़ माफी योजना और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने जैसे कदम उन्हीं की देखरेख में हुए। जेटली पेशे से वकील भी थे और सुप्रीम कोर्ट में कई अहम मामलों में पैरवी की। उनकी कानूनी समझ ने नीति निर्माण में बड़ी मदद की। मोदी के साथ उनका रिश्ता केवल आधिकारिक नहीं था। दोनों एक‑दूसरे पर पूरा भरोसा करते थे। कई मौकों पर अमित शाह से पहले जेटली को ही मोदी का सबसे खास माना जाता था। वे अपनी सादगी और सीधी बात के लिए जाने जाते थे। मीडिया से बात करते समय वे तथ्यों पर टिके रहते थे और विवादों से बचते थे। उनके निधन के बाद पार्टी और सरकार ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। आज भी उनके आर्थिक सुधारों का असर दिखाई देता है। जेटली की विरासत नई पीढ़ी के नेताओं के लिए एक मिसाल बनी हुई है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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