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असम में बाल विवाह पर सख्त अभियान: एक नवंबर से तीस दिन चलेंगे विशेष प्रयास
14/8/2026, 11:56:01 pm

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असम सरकार ने एक नवंबर से शुरू होने वाले तीस दिवसीय विशेष अभियान की घोषणा की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य में बाल विवाह को पूरी तरह खत्म करना है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि अभियान में पुलिस, सामाजिक कल्याण विभाग और पंचायती राज संस्थान मिलकर काम करेंगे। जिला स्तर पर विशेष टीमें बनाई जाएंगी जो गाँव‑गाँव जाकर अवैध बाल विवाह की सूचना इकट्ठा करेंगी और तुरंत कार्रवाई करेंगी। अभियान के तहत स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएँगे ताकि किशोर और किशोरियों को बाल विवाह के कानून और उसके सामाजिक दुष्प्रभावों के बारे में बताया जा सके। साथ ही, टोल‑फ्री हेल्पलाइन नंबर शुरू किए जाएँगे जहाँ कोई भी पीड़ित या गवाह गुप्त रूप से शिकायत कर सके। अभियान की निगरानी के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित की जाएगी, जिसके द्वारा नागरिक तुरंत शिकायत दर्ज कर सकेंगे और अधिकारियों को तत्काल सूचना मिलेगी। स्थानीय एनजीओ और महिला स्वयं सहायता समूहों को अभियान में शामिल किया गया है ताकि वे जमीनी स्तर पर प्रचार‑प्रसार कर सकें। वर्तमान में असम में 18 वर्ष से कम आयु की लड़कियों के विवाह का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से थोड़ा अधिक है, जिसे सरकार अब कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। बच्चों के अधिकारों के संरक्षण अधिनियम 2006 के तहत बाल विवाह करने वाले को दो साल की कारावास और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है, और अभियान अवधि के दौरान इस कानून का कड़ाई से पालन किया जाएगा। अभियान के लिए पांच करोड़ रुपये का विशेष बजट मंजूर किया गया है, जिसका उपयोग प्रशिक्षण, जागरूकता सामग्री, मोबाइल एप विकास और ग्रामीण इलाकों में नुक्कड़ नाटक जैसे कार्यक्रमों में किया जाएगा। अभियान के तहत प्रत्येक जिले में एक nodal officer नियुक्त किया जाएगा जो रोज़ की प्रगति रिपोर्ट तैयार करेगा और राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष को भेजेगा। इस नियंत्रण कक्ष में वरिष्ठ आईएएस और पुलिस अधिकारी शामिल होंगे जो रोज़ बैठक करेंगे और बाधाओं का त्वरित समाधान करेंगे। धार्मिक और सामाजिक नेताओं को भी कार्यशालाओं में आमंत्रित किया जाएगा ताकि वे समुदाय में सही संदेश दे सकें। सरकार का लक्ष्य है कि अभियान की अवधि समाप्त होने तक बाल विवाह के दर्ज मामलों में बीस प्रतिशत की कमी लाई जाए और अगले एक साल में इस संख्या को चालीस प्रतिशत तक कम किया जाए। इसके लिए सामाजिक बदलाव पर भी जोर दिया जाएगा और शिक्षा विभाग द्वारा पाठ्यक्रम में लैंगिक समानता और बच्चों के अधिकारों के विषय को शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि तीस दिन के इस अभियान से असम में बाल विवाह के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट आएगी और आने वाले वर्षों में यह प्रथा पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। अभियान समाप्त होने के बाद एक समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी जहाँ प्राप्त परिणामों का मूल्यांकन करके भविष्य की रणनीति तय की जाएगी। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
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