भारत
अठावले ने आरक्षण खत्म करने की मांग पर राजद्रोह की चेतावनी दी
24/8/2026, 1:21:08 am

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केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने महाराष्ट्र में आरक्षण खत्म करने की मांग करने वालों पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की बात कही।
उन्होंने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि आरक्षण संविधान का हिस्सा है और इसे हटाने की कोशिश करना देश की एकता के लिए खतरा है।
अठावले ने कहा कि जो भी व्यक्ति या संगठन आरक्षण को समाप्त करने की बात करता है, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि राजद्रोह की धारा 124ए के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है, क्योंकि ऐसी मांग संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है।
इस बयान के बाद राजनीतिक दलों में प्रतिक्रियाएं आईं। भाजपा ने अठावले के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि आरक्षण सामाजिक न्याय का आधार है।
वहीं शिवसेना और कांग्रेस ने इसे राजनीतिक लाभ के लिए भड़काऊ बयान बताया और कहा कि इस तरह की बातें समाज में तनाव बढ़ा सकती हैं।
महाराष्ट्र सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन पुलिस ने कहा कि यदि कोई शिकायत मिलती है तो कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होगी।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अठावले के बयान को संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत दिए गए आरक्षण के अधिकार को कमजोर करने वाला बताया।
उन्होंने मांग की कि सरकार आरक्षण नीति पर स्पष्ट रुख अपनाए और किसी भी तरह के भड़काऊ बयान से बचे।
इस बीच, आरक्षण के मुद्दे पर देश भर में बहस जारी है और कई राज्यों में इसे लेकर आंदोलन हो रहे हैं।
अठावले ने कहा कि वे आगे भी इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराएंगे और जरूरी कानूनी संशोधन प्रस्तावित करेंगे।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि राजद्रोह की धारा 124ए का उपयोग केवल देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले बयानों पर होना चाहिए, न कि नीतिगत बहस पर।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को संरक्षित किया है, बशर्ते वह हिंसा या अलगाव को उकसाए नहीं।
महाराष्ट्र के कई विश्वविद्यालयों में छात्र संगठनों ने अठावले के बयान के विरोध में प्रदर्शन किए और मांग की कि सरकार आरक्षण नीति पर खुली चर्चा करे।
उधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रवक्ता ने कहा कि आरक्षण सामाजिक समरसता के लिए जरूरी है और किसी भी प्रयास को रोकने के लिए कानून का सहारा लिया जाना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि आरक्षण का मुद्दा अभी भी भारतीय राजनीति में संवेदनशील बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और बहस होगी।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
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