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बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने मक्का समझौते पर रुख बदला, विशेषज्ञों ने कहा यू‑टर्न

28/8/2026, 4:57:02 am
बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने मक्का समझौते पर रुख बदला, विशेषज्ञों ने कहा यू‑टर्न
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बांग्लादेश के विदेश मंत्री ख़लीलुर रहमान ने सोमवार को संसद में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति के लिए जरूरी है। रहमान ने बताया कि समझौते में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों के साथ रक्षा सहयोग, प्रशिक्षण और सूचना साझा करना शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे बांग्लादेश की सेना की क्षमता बढ़ेगी। पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश ने अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखा था और किसी एक बड़ी ताकत के साथ गहरी सैन्य साझेदारी से परहेज किया था। सरकार का जोर दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया के देशों से संबंध मजबूत करने पर रहा। इस नई घोषणा के बाद कई विश्लेषकों ने इसे पारंपरिक नीति से साफ उलट (यू‑टर्न) बताया। उनका कहना है कि ढाका अब खाड़ी गुट के करीब आ रहा है, जो पहले उसकी रणनीति का हिस्सा नहीं था। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बदलाव के पीछे आर्थिक प्रोत्साहन बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। सऊदी अरब ने हाल में बांग्लादेश को निवेश और ऊर्जा क्षेत्र में कई प्रस्ताव दिए हैं। इसके अलावा, क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता — जैसे ईरान‑सऊदी तनाव और लाल सागर में समुद्री सुरक्षा खतरे — ने बांग्लादेश को अपने दायरे को बढ़ाने के लिए प्रेरित किया हो सकता है। मक्का समझौता मुख्य रूप से खाड़ी देशों के बीच संयुक्त रक्षा अभ्यास, खुफिया जानकारी साझा करना और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। बांग्लादेश की भागीदारी से वह इन गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा सकेगा। सरकार का दावा है कि यह कदम राष्ट्रीय हित में है और किसी भी पक्ष के साथ गठबंधन नहीं दर्शाता। विपक्ष ने हालांकि संसद में इस पर सवाल उठाए और पारदर्शिता की मांग की। आने वाले महीनों में समझौते के क्रियान्वयन और इसके क्षेत्रीय असर पर नजर रहेगी। विश्लेषक मानते हैं कि बांग्लादेश की विदेश नीति में यह पहला बड़ा मोड़ है।
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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