लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
विश्व

बांग्लादेश में प्रशिक्षण के दौरान टाइप-59 टैंक में धमाका, दो जवान शहीद

9/9/2026, 5:42:23 am
बांग्लादेश में प्रशिक्षण के दौरान टाइप-59 टैंक में धमाका, दो जवान शहीद
Original publisher image
बांग्लादेश सेना के एक नियमित प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान चीनी मूल के टाइप-59 टैंक में हुए जोरदार धमाके ने दो जवानों की जान ले ली। हादसा सोमवार सुबह चटगांव जिले के सीताकुंड उपजिला स्थित फौजी शिविर के फायरिंग रेंज में हुआ। सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल अब्दुल्ला अल मामून ने बताया कि टैंक उस वक्त लाइव फायरिंग ड्रिल कर रहा था, जब अचानक बैरल के पास विस्फोट हुआ। धमाका इतना तेज था कि टैंक का टरेट उछलकर दूर जा गिरा। मरने वालों में 32 वर्षीय हवलदार मोहम्मद रफीकुल इस्लाम और 26 वर्षीय सिपाही अब्दुल करीम शामिल हैं। दोनों चटगांव के ही रहने वाले थे। एक लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के अधिकारी भी झुलस गए, जिन्हें तुरंत चटगांव स्थित संयुक्त सैन्य अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत खतरे से बाहर है। टाइप-59 टैंक चीन में निर्मित सोवियत टी-54ए का लाइसेंस-उत्पादित संस्करण हैं। बांग्लादेश ने 1974 में चीन से पहली खेप खरीदी थी। तब से ये टैंक सेना के बख्तरबंद ब्रिगेड की रीढ़ बने हुए हैं। मौजूदा समय में बांग्लादेश के पास लगभग 300 टाइप-59 और टाइप-69 टैंक हैं। रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स की किल्लत और पुराने पड़ चुके गोला-बारूद की वजह से इनमें तकनीकी खराबी आम बात हो चली है। रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) शकील अहमद कहते हैं, "पचास साल पुराने टैंकों को लाइव फायरिंग में उतारना हमेशा जोखिम भरा होता है। सेना आधुनिकीकरण की कोशिश कर रही है, मगर बजट और खरीद प्रक्रिया की सुस्ती आड़े आती है।" पिछले साल भी इसी शिविर में एक टाइप-59 में आग लगी थी, तब चालक दल बाल-बाल बच गया था। घटना के बाद सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमां ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम टैंक के अवशेष, गोला-बारूद का बैच और रखरखाव रिकॉर्ड खंगाल रही है। एहतियात के तौर पर सभी टाइप-59 टैंकों की फायरिंग फिलहाल रोक दी गई है। मृतक जवानों को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। उनके परिवारों को नियमानुसार मुआवजा और पेंशन लाभ दिए जाएंगे। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

संबंधित