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बीबीसी जांच: कागज़ी दलों के चंदे पर सियासी तूफान

5/9/2026, 1:20:43 pm
बीबीसी जांच: कागज़ी दलों के चंदे पर सियासी तूफान
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बीबीसी की नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कई राजनीतिक दलों ने कागज़ी कंपनियों के जरिए चंदा लिया। रिपोर्ट के मुताबिक ये कंपनियाँ असल कारोबार नहीं करतीं, फिर भी लाखों रुपये दलों के खातों में पहुँचे। जांच में पाया गया कि 2023‑24 के वित्त वर्ष में कम से कम बारह दलों को ऐसी कंपनियों से 60 करोड़ रुपये से अधिक मिले। दस्तावेज़ों में कंपनियों के पते एक ही बिल्डिंग के अलग‑अलग कमरे दिखाए गए हैं। इससे साफ होता है कि चंदे का स्रोत छिपाने के लिए एक सुनियोजित नेटवर्क काम कर रहा था। इस खुलासे के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के नेताओं ने तुरंत जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसा चंदा चुनावी पारदर्शिता के सिद्धांत के खिलाफ है। कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल ने अपने खाते साफ रखने के लिए फर्जी कंपनियों का सहारा लिया। भाजपा नेता ने पलटवार करते हुए कहा कि सभी दलों को समान मानक अपनाने चाहिए। संसद में भी इस मुद्दे पर बहस की मांग उठी। शनिवार को राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग की निगरानी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आयोग को कागज़ी कंपनियों के लेन‑देन पकड़ने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए, वरना जनता का भरोसा टूटेगा। सिंह ने आयोग से पूछा कि उसने अब तक कितनी शेल कंपनियों की पहचान की है। उन्होंने यह भी मांग की कि चंदे की रसीदें ऑनलाइन सार्वजनिक की जाएँ। उनकी बात का समर्थन कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया। राजनीतिक विश्लेषकों की राय बँटी हुई है। कुछ का कहना है कि बीबीसी के सबूत अभी प्रारंभिक हैं और गहरी जांच जरूरी है। दूसरे विश्लेषक मानते हैं कि मौजूदा कानून – जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और कंपनी अधिनियम – पहले ही ऐसे लेन‑देन पर रोक लगाते हैं, लेकिन उनका अमल कमज़ोर रहा है। उन्होंने चंदे की ऑनलाइन रिपोर्टिंग और रियल‑टाइम सार्वजनिक करने का सुझाव दिया। एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि पारदर्शिता के बिना लोकतंत्र कमज़ोर होता है। कई दलों के प्रवक्ताओं ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा पारदर्शी चंदा लेती रही है और वे किसी भी जांच का स्वागत करते हैं। चुनाव आयोग ने अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन सूत्रों के अनुसार आयोग आंतरिक समीक्षा शुरू कर चुका है। आयोग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नए डेटा‑माइनिंग टूल्स का परीक्षण चल रहा है। विपक्ष ने चेतावनी दी कि देरी हुई तो मामला अदालत तक जा सकता है। जनता भी सोशल मीडिया पर पारदर्शिता की मांग कर रही है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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