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बेटीह के रिटायर्ड सूबेदार मेजर के पुत्र बने सेना के लेफ्टिनेंट

5/9/2026, 8:48:23 pm
बेटीह के रिटायर्ड सूबेदार मेजर के पुत्र बने सेना के लेफ्टिनेंट
बेटीह, पश्चिमी चम्पारण, बिहार में एक गर्व की खबर फैल रही है। सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर राम सिंह के पुत्र अमित कुमार को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट की पदवी मिली है। अमित ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बेटीह के सरकारी उच्च विद्यालय से पूरी की और बाद में पटना के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से स्नातक किया। स्नातक के दौरान उन्होंने सेना में अधिकारी बनने का लक्ष्य रखा और इसके लिए सीडीएस परीक्षा की तैयारी शुरू की। पिछले वर्ष अगस्त में आयोजित संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा (सीडीएस) में अमित ने सभी पेपर में अच्छे अंक हासिल किए और लिखित परीक्षा पास की। उसके बाद उन्होंने एसएसबी इंटरव्यू के लिए भोपाल केंद्र पर उपस्थित होकर शारीरिक, मानसिक और नेतृत्व क्षमता के सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पास किए। चयन के पश्चात् उन्हें चेन्नई के अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (ओटीए) में प्रशिक्षण के लिए चुना गया। ओटीए में अमित को कठोर शारीरिक drill,武器 प्रशिक्षण, टैक्टिकल अभ्यास और नेतृत्व पाठ्यक्रम दिए गए। एक साल के प्रशिक्षण期間 में उन्होंने लगातार अनुशासन और दृढ़ता दिखाई। अंतिम डिक्की परेड में उनके प्रदर्शन को देखकर प्रशिक्षण अधिकारियों ने उन्हें लेफ्टिनेंट की रैंक से नवाज़ा। कमीशन मिलने के बाद अमित को बिहार रेजिमेंट में पहली पोस्टिंग मिली है, जहां वे जल्द ही जम्मू‑कश्मीर सीमा पर तैनात होंगे। राम सिंह ने सेना में तीस वर्षों तक विभिन्न इकाइयों में सेवा दी और 2018 में मानद सेवानिवृत्ति प्राप्त की। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपने खेतों में काम करते हुए परिवार का भरण‑पोषण किया। उन्होंने हमेशा बेटे को राष्ट्र की सेवा करने की प्रेरणा दी। अमित की ममी भी घर में अनुशासन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। स्थानीय स्तर पर इस सफलता को लेकर खुशी की लहर है। Bettiah के युवा क्लब और महिला मंडल ने मिलकर अमित के सम्मान में एक छोटा समारोह आयोजित किया, जहां फूल mala, मिठाई और शॉल भेंट किए गए। जिला अधिकारी ने भी एक प्रशंसा पत्र भेजकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अमित की कहानी अब क्षेत्र के युवाओं के लिए एक उदाहरण बन गई है कि लक्ष्य निर्धारित करके मेहनत से कोई भी मुश्किल राह पार की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सेना में अधिकारी बनना उनका सपना नहीं, बल्कि कर्तव्य है, और वे अपने पिता के पदचिन्हों पर चलकर देश की सीमाओं की रक्षा करेंगे। इस उपलब्धि से न केवल उनका परिवार गौरवान्वित है, बल्कि पूरा Bettiah समुदाय भी उनकी सफलता को साझा कर रहा है।
समाचार स्रोत: Google News — Bettiah (Hindi)

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