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बिहार में बाढ़: तैयारी में चूक, जनता बेहाल

8/9/2026, 2:02:42 pm
बिहार में बाढ़: तैयारी में चूक, जनता बेहाल
बिहार में इस बार की बाढ़ ने फिर साबित कर दिया कि कागज़ी योजनाएं ज़मीन पर नहीं उतरतीं। नेपाल से आने वाली नदियों — कोसी, गंडक, बागमती — का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। उत्तर बिहार के 15 से ज़्यादा ज़िले पानी में डूबे हैं। लाखों लोग बेघर हुए, फसलें बर्बाद हुईं, मवेशी बह गए। सरकार हर साल बाढ़ पूर्व तैयारी की बात करती है। तटबंध मरम्मत, नाले सफाई, राहत शिविर चिह्नित करना, नावों का इंतज़ाम — ये सब कागज़ों पर पूरे दिखते हैं। मगर हक़ीक़त में तटबंध कमज़ोर हैं, नाले भरे पड़े हैं, नावें कम पड़ गईं। कई गांवों तक तीन-चार दिन बाद मदद पहुंची। आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस साल तटबंध मरम्मत पर 1,200 करोड़ रुपये खर्च हुए। फिर भी 40 से ज्यादा जगहों पर तटबंध टूटे। स्थानीय लोग कहते हैं कि ठेकेदारों ने बालू-मिट्टी डालकर काम चला दिया, मजबूती नहीं दी। जांच की मांग उठ रही है, पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं। राहत शिविरों में हालत खराब है। खाना कम, दवा नहीं, शौचालय गंदे। महिलाओं-बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कत। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगी हैं, पर संसाधन कम पड़ रहे। हेलीकॉप्टर से खाना गिराने की नौबत आई, पर मौसम खराब होने से वह भी रुका रहा। मुख्यमंत्री ने हवाई सर्वे किया, मुआवज़े का ऐलान किया। विपक्ष इसे चुनावी स्टंट बता रहा है। सवाल यह नहीं कि बाढ़ आई, सवाल यह है कि हर साल वही कहानी क्यों दोहराती है? जब तक योजना और क्रियान्वयन का फासला नहीं मिटेगा, बिहार की जनता यूं ही 'जल त्रासदी' झेलती रहेगी। समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)

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