लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
bihar

बिहार के नेता ने सुनाए बचपन के किस्से: घाव पर मकड़ी का जाला और गांव की देसी दवा

19/9/2026, 11:30:00 pm
बिहार के नेता ने सुनाए बचपन के किस्से: घाव पर मकड़ी का जाला और गांव की देसी दवा
पटना: बिहार के एक जाने-माने नेता ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान अपने बचपन की यादें ताजा कीं। उन्होंने बताया कि गांव में चोट लगने पर डॉक्टर नहीं, बल्कि दादी-नानी के नुस्खे काम आते थे। एक किस्सा सुनाते हुए उन्होंने कहा, "एक बार पैर में गहरी चोट लग गई थी। खून नहीं रुक रहा था। तब बड़े-बुजुर्गों ने मकड़ी का जाला तोड़कर घाव पर चिपका दिया। सुनने में अजीब लगे, लेकिन खून तुरंत रुक गया।" नेता जी ने बताया कि उन दिनों गांव में अस्पताल दूर होते थे। सड़कें नहीं थीं। बीमार पड़ने पर शहर जाना मुश्किल था। इसलिए हर घर में देसी इलाज का भंडार होता था। हल्दी, नीम, तुलसी, फिटकरी — ये सब प्राथमिक चिकित्सा किट का हिस्सा थे। उन्होंने एक और वाकया साझा किया: "बरसात में पैर में कांटा चुभ गया था। सूजन आ गई। मां ने नीम की पत्तियां पीसकर लेप लगा दिया। दो दिन में आराम मिल गया।" ऐसी बातें सुनकर कार्यक्रम में मौजूद युवा हैरान थे। नेता जी ने कहा कि वो जमाना और था। संसाधन कम थे, लेकिन अपनापन ज्यादा था। पूरा गांव एक परिवार की तरह होता था। किसी के घर बीमारी हो तो पड़ोसी खुद दौड़े चले आते थे। आज सुविधाएं बढ़ी हैं, पर वो रिश्तों की गर्माहट कम हुई है। उनके ये किस्से सोशल मीडिया पर भी चर्चा में हैं। लोग पुराने देसी नुस्खों पर बात कर रहे हैं। कुछ बुजुर्ग इनकी पुष्टि कर रहे हैं, तो युवा पीढ़ी इन्हें रोचक मान रही है। समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)

संबंधित