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भारत

सीमावर्ती राज्यों के डीएम को नागरिकता देने का अधिकार, नए नियम लागू

19/8/2026, 8:33:14 pm
सीमावर्ती राज्यों के डीएम को नागरिकता देने का अधिकार, नए नियम लागू
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केंद्र सरकार ने नागरिकता नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब सीमावर्ती राज्यों के जिलाधिकारी (डीएम) को नागरिकता प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार मिल गया है। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के बाद यह प्रावधान तुरंत लागू हो गया। पहले केवल केंद्रीय गृह सचिव या राज्य के वरिष्ठ अधिकारी ही नागरिकता दे सकते थे। नए नियम के तहत असम, पश्चिम बंगाल, पंजाब, राजस्थान, गुजरात और मणिपुर जैसे राज्यों के डीएम आवेदनों की जांच करेंगे और योग्य पाए जाने पर प्रमाणपत्र देंगे। आवेदक को निवास प्रमाण, पहचान पत्र और वंशावली के दस्तावेज जमा करने होंगे। डीएम दस्तावेजों की पड़ताल के बाद 30 दिन में फैसला लेंगे। सरकार का कहना है कि इससे सीमावर्ती इलाकों में लंबित मामलों का निपटारा तेज होगा और लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। पहले नागरिकता के आवेदन केंद्रीय स्तर पर ही निपटाए जाते थे, जिससे देरी होती थी। अब जिला स्तर पर ही फैसला होने से शरणार्थियों और सीमावर्ती निवासियों को राहत मिलेगी। विपक्षी दलों ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अधिकार डीएम को देने से भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ सकती है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि डीएम के फैसले की अपील केंद्रीय गृह सचिव के पास होगी। पारदर्शिता के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया है। पोर्टल पर आवेदक अपने आवेदन की स्थिति देख सकेंगे और दस्तावेज अपलोड कर सकेंगे। डीएम को हर महीने प्रगति रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजनी होगी। अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए गृह मंत्रालय ने कार्यशालाएं आयोजित की हैं, ताकि नियमों का सही पालन हो। नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन के बाद यह पहला मौका है जब जिला स्तर पर इतना बड़ा अधिकार दिया गया है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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