लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
विश्व

ब्रिक्स 2026: भारत के पास वैश्विक नेतृत्व दिखाने का मौका, पर चुनौतियां कम नहीं

12/9/2026, 3:15:06 am
ब्रिक्स 2026: भारत के पास वैश्विक नेतृत्व दिखाने का मौका, पर चुनौतियां कम नहीं
Original publisher image
भारत 2026 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। यह पांच देशों के समूह — ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका — का वार्षिक जमावड़ा है। पिछले साल जोहान्सबर्ग में हुए सम्मेलन में छह नए सदस्य जोड़े गए थे, जिनमें ईरान, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। सऊदी अरब ने अभी औपचारिक रूप से सदस्यता नहीं ली है। वाशिंगटन स्थित विल्सन सेंटर के दक्षिण एशिया निदेशक माइकल कुगेलमैन कहते हैं कि यह सम्मेलन भारत के लिए 'वैश्विक नेतृत्व की साख दोबारा स्थापित करने' का सुनहरा मौका है। उनके मुताबिक, नई दिल्ली ब्रिक्स को 'ग्लोबल साउथ की आवाज़' के रूप में पेश कर सकती है और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की पैरवी कर सकती है। लेकिन राह आसान नहीं है। कुगेलमैन तीन बड़ी चुनौतियां गिनाते हैं। पहली, चीन के साथ सीमा विवाद और व्यापार असंतुलन। ब्रिक्स में बीजिंग का दबदबा बढ़ रहा है और वह समूह को अपने हितों के मुताबिक ढालने की कोशिश करता है। दूसरी, रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते पश्चिमी देशों का दबाव। भारत को संतुलन साधना होगा। तीसरी, ब्रिक्स के नए सदस्यों में आपसी मतभेद — मसलन ईरान और सऊदी अरब के रिश्ते — समूह की एकता पर असर डाल सकते हैं। भारत के लिए अच्छा संकेत यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स को 'समावेशी सहयोग' का मंच बताया है। नई दिल्ली डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, जलवायु वित्त और सुधारवादी बहुपक्षवाद पर जोर दे सकती है। जानकार मानते हैं कि अगर भारत एजेंडा तय करने में कामयाब रहा तो 2026 का शिखर सम्मेलन उसकी वैश्विक छवि के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

संबंधित