लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
भारत

ब्रिक्स सम्मेलन में सीमा पार भुगतान तंत्र पर जोर, डॉलर-यूरो पर निर्भरता घटाने की कवायद

8/9/2026, 4:40:55 am
ब्रिक्स सम्मेलन में सीमा पार भुगतान तंत्र पर जोर, डॉलर-यूरो पर निर्भरता घटाने की कवायद
Original publisher image
नई दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स सम्मेलन का मुख्य एजेंडा सीमा पार सुगम भुगतान तंत्र तैयार करना है। सदस्य देशों ने एक साझा मंच पर सहमति जताई कि मौजूदा डॉलर और यूरो पर अत्यधिक निर्भरता कम की जाए। बैठक में भारत, चीन, रूस, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका के वित्त मंत्रियों ने एक तकनीकी समिति गठित करने का फैसला लिया। यह समिति ब्लॉकचेन, केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा और मौजूदा भुगतान नेटवर्क को जोड़ने वाले प्रोटोकॉल पर काम करेगी। अमेरिकी डॉलर और यूरो की प्रमुखता से छोटे अर्थव्यवस्थाओं को विनिमय दर जोखिम और लेनदेन शुल्क का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था से सदस्य देश अपनी मुद्राओं में सीधे व्यापार निपटा सकेंगे और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा। भारत ने अपनी यूपीआई और भीम प्लेटफॉर्म का उदाहरण देते हुए कहा कि घरेलू स्तर पर त्वरित भुगतान संभव है। इसी तर्ज पर ब्रिक्स देश एक अंतरराष्ट्रीय इंटरऑपरेबल सिस्टम बना सकते हैं, जिससे लेनदेन कुछ सेकंड में पूरा हो। हालांकि, तकनीकी मानक, नियामक मंजूरी और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दे अभी अनसुलझे हैं। सदस्य देशों की अलग‑अलग मौद्रिक नीतियां भी एकसमान प्रोटोकॉल बनाने में बाधा डाल सकती हैं। सम्मेलन के अंत में जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि अगले छह महीने में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। सफलता मिलने पर 2027 तक पूर्ण रूप से संचालित प्रणाली लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल सफल होती है तो वैश्विक वित्तीय ढांचे में बड़ा परिवर्तन आएगा। डॉलर की एकाधिकार स्थिति कमजोर होगी और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अधिक वित्तीय स्वायत्तता मिलेगी। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

संबंधित