विश्व
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन दिल्ली में: कांग्रेस बंटी, चिदंबरम ने उठाए सवाल, थरूर ने गिनाए फायदे
11/9/2026, 2:08:56 pm

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ब्रिक्स का 18वां शिखर सम्मेलन आज नई दिल्ली में शुरू हो गया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात कर चुके हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी अगले कुछ घंटों में राजधानी पहुंचने वाले हैं। तीनों बड़े देशों के नेताओं की मौजूदगी से इस बैठक को वैश्विक राजनीति में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
इस मौके पर कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं ने संगठन की उपयोगिता पर अलग-अलग राय रखी है। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि ब्रिक्स से भारत को अब तक ठोस आर्थिक लाभ नहीं मिला है। उन्होंने पूछा कि क्या यह मंच केवल बयानबाजी तक सीमित रहेगा या वास्तविक परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगा। चिदंबरम ने यह भी याद दिलाया कि पिछले शिखर सम्मेलनों में घोषित कई समझौते अब तक लागू नहीं हुए।
दूसरी ओर, सांसद शशि थरूर ने ब्रिक्स के फायदे गिनाते हुए कहा कि बहुध्रुवीय विश्व में भारत की आवाज को मजबूत करने के लिए यह समूह आवश्यक है। थरूर ने ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार विस्तार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं बताईं। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिक्स के माध्यम से भारत दक्षिण‑दक्षिण सहयोग को नई दिशा दे सकता है।
कांग्रेस के अंदर इस मतभेद से पार्टी की विदेश नीति पर असर पड़ सकता है। कुछ कार्यकर्ता मानते हैं कि चिदंबरम की चिंता जायज है क्योंकि पिछले वर्षों में ठोस नतीजे नहीं दिखे। वहीं अन्य नेता थरूर के तर्क को व्यावहारिक मानते हुए कहते हैं कि ब्रिक्स भारत को नए बाजार और निवेश के रास्ते खोल सकता है। पार्टी नेतृत्व ने अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
शिखर सम्मेलन के एजेंडे में आर्थिक सहयोग, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद निरोध और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं। मोदी सरकार को उम्मीद है कि बैठक से विदेशी निवेश और निर्यात के नए अवसर पैदा होंगे। विश्लेषकों का कहना है कि पुतिन और शी की उपस्थिति से भू‑राजनीतिक संतुलन पर भी असर पड़ेगा, खासकर यूक्रेन संकट और हिंद‑प्रशांत क्षेत्र की गतिविधियों के संदर्भ में।
सम्मेलन के नतीजे अगले कुछ दिनों में सामने आएंगे। तब तक राजनीतिक दल, विशेषज्ञ और मीडिया अपनी‑अपनी व्याख्या पेश करते रहेंगे। देश की जनता भी यह देखना चाहेगी कि क्या ब्रिक्स वास्तव में भारत के विकास को गति दे पाता है या फिर यह केवल प्रतीकात्मक मंच बनकर रह जाएगा।
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
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