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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पुतिन और शी के साथ चर्चा, लेकिन भारत को क्या मिला?

13/9/2026, 3:04:58 pm
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पुतिन और शी के साथ चर्चा, लेकिन भारत को क्या मिला?
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ब्रिक्स के 18वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी नई दिल्ली ने की. शनिवार को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत ब्रिक्स सदस्य देशों के शीर्ष नेता एकजुट हुए. सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, जलवायु परिवर्तन और सुरक्षा पर चर्चा हुई और अंत में ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ जारी किया गया. इस घोषणापत्र में सदस्य देशों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने, नए विकास बैंक की पूंजी में वृद्धि और हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए संयुक्त कोष बनाने का संकल्प लिया. भारत की Perspective: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो पक्षीय वार्ता में पुतिन से ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर जोर दिया, जबकि शी जिनपिंग से सीमाई शांति और व्यापार असंतुलन कम करने के उपायों पर चर्चा की. सम्मेलन के बाद भारत ने ब्रिक्स व्यापार मंच के माध्यम से छोटे और मध्यम उद्यमों को वित्तीय सहायता देने की योजना की घोषणा की, जिससे निर्यात बढ़ने की उम्मीद है. साथ ही, भारत ने ब्रिक्स नई विकास बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा, जिससे भविष्य में आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए अधिक धन उपलब्ध हो सके. विश्लेषकों का मानना है कि जबकि घोषणापत्र में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं, लेकिन उनके कार्यान्वयन की स्पष्ट समय सीमा और तंत्र अभी अस्पष्ट है. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में जिन समझौतों की बात हुई, उनका वास्तविक प्रभाव देखने में महीनों या सालों लग सकते हैं. साथ ही, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील जैसे अन्य सदस्य देशों की प्राथमिकताओं में जलवायु वित्त और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर जोर देखा गया, जिससे भारत को अपने क्षेत्रीय हितों को संतुलित करने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. इस प्रकार, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने भारतीय नीति निर्माताओं को नए अवसर दिखाए हैं, परंतु वास्तविक लाभ प्राप्त करने के लिए आगे की कार्रवाई और निगरानी आवश्यक रहेगी. समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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