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कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश: जनगणना ड्यूटी पर शिक्षक स्कूल ड्यूटी माने जाएंगे, इनकार नहीं
21/8/2026, 4:09:53 am

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है जिसमें कहा गया है कि जनगणना कार्य में नियुक्त किए गए शिक्षकों की ड्यूटी स्कूल ड्यूटी के बराबर मानी जाएगी और वे इस कार्य से इनकार नहीं कर सकते। अदालत ने इस मामले में पश्चिम बंगाल के कुछ शिक्षकों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की, जिनकी आपत्ति थी कि जनगणना जैसी गैर‑शैक्षणिक ड्यूटी लगने से स्कूली पढ़ाई प्रभावित होती है। न्यायमूर्ति की डिवीजन बेंच ने कहा कि जनगणना दस‑साल में एक बार होने वाला राष्ट्रीय महत्व का कार्य है, जिसकी सही ढंग से पूर्ति नीति निर्माण और योजना के आधार के रूप में आवश्यक है। इसलिए हर नागरिक, शिक्षक सहित, को इस संवैधानिक दायित्व का पालन करना होगा।
शिक्षक संगठनों ने लंबे समय से मांग की है कि शिक्षकों को चुनाव, जनगणना आदि से मुक्त रखा जाए, क्योंकि इन कार्यों में लगने से कक्षाएं खाली रहती हैं और बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। हालांकि अदालत ने जनहित को प्राथमिकता देते हुए कहा कि संविधान के तहत जनगणना कराना राज्य का कर्तव्य है और इसकी सफलता के लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित enumerators की जरूरत होती है। शिक्षक पढ़े‑लिखे होने और फॉर्म भरने में दक्ष होने के कारण उनकी भूमिका सबसे अहम मानी गई।
राज्य सरकार के वकील ने बताया कि जनगणना 2021 को कोरोना महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी और अब यह 2025‑26 में प्रस्तावित है। इसके लिए लगभग दस लाख प्रगणकों की आवश्यकता होगी, जिनमें शिक्षकों के अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और पंचायत प्रतिनिधि भी शामिल किए जाएंगे। लेकिन शिक्षकों की उपलब्धि और विश्वसनीयता को देखते हुए अदालत ने उनका उपयोग उचित ठहराया।
अदालत ने स्कूल शिक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जनगणना ड्यूटी पर गए शिक्षकों की अनुपस्थिति को अवकाश नहीं माना जाएगा; उनकी यह ड्यूटी नियमित स्कूल ड्यूटी जैसी होगी। इससे उनका वेतन, भत्ते और सेवा शर्तें अपरिवर्तित रहेंगी। यदि कोई शिक्षक वैध कारण के बिना जनगणना कार्य करने से मना करता है तो उसे सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
फैसले पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया भी आई। भाजपा ने इसे राष्ट्रीय interesse के अनुकूल कदम बताया, जबकि कुछ विपक्षी नेताओं ने शिक्षकों के कार्यभार में वृद्धि की चिंता जताई और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की। अदालत ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य किसी को अतिभारित करना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय कार्य को सुचारू रूप से पूरा करना है।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
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