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सीबीआई की कानूनी वैधता के लिए कानून में संशोधन की तैयारी, राज्यों की सहमति बनी बड़ी बाधा

20/8/2026, 11:50:42 pm
सीबीआई की कानूनी वैधता के लिए कानून में संशोधन की तैयारी, राज्यों की सहमति बनी बड़ी बाधा
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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कानूनी वैधता और अधिकार क्षेत्र को लेकर लंबे समय से चल रही बहस अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। केंद्र सरकार दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम में संशोधन की तैयारी कर रही है, ताकि सीबीआई का कानूनी आधार मजबूत हो और राज्यों की सहमति की बाध्यता से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतें दूर की जा सकें। मौजूदा व्यवस्था के तहत सीबीआई किसी भी राज्य में जांच शुरू करने से पहले वहां की सरकार से सहमति लेती है। यह सहमति दो तरह की होती है — सामान्य सहमति और मामला-दर-मामला सहमति। कई राज्यों ने सामान्य सहमति वापस ले रखी है, जिससे सीबीआई को हर केस के लिए अलग से अनुमति लेनी पड़ती है। इससे जांच में देरी होती है और कई बार अहम सबूत नष्ट होने का खतरा रहता है। सूत्रों के मुताबिक, विधि मंत्रालय और कार्मिक विभाग मिलकर संशोधन का मसौदा तैयार कर रहे हैं। प्रस्तावित बदलावों में सीबीआई को कुछ खास श्रेणी के मामलों — जैसे भ्रष्टाचार के बड़े केस, अंतरराज्यीय अपराध, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले — में राज्यों की पूर्व सहमति के बिना जांच का अधिकार देने पर विचार हो रहा है। साथ ही, एजेंसी के निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया और कार्यकाल को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए जा सकते हैं। विपक्षी दल और कुछ राज्य सरकारें इसे संघीय ढांचे पर हमला बता चुकी हैं। उनका तर्क है कि कानून-व्यवस्था राज्य सूची का विषय है और केंद्र इसे अपने नियंत्रण में लेना चाहता है। वहीं, सरकार का पक्ष है कि भ्रष्टाचार और संगठित अपराध राज्यों की सीमाओं से परे हैं, इसलिए एक सशक्त केंद्रीय एजेंसी जरूरी है। अगले संसद सत्र में संशोधन विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। सभी पक्षों की राय लेने के बाद ही अंतिम रूप दिया जाएगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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